गुड़ाबांदा के जंगलों में बेशकीमती खनिजों पर माफियाओं की नजर, अवैध खनन और तस्करी की आशंका

गुड़ाबांदा के जंगलों में बेशकीमती खनिजों पर माफियाओं की नजर, अवैध खनन और तस्करी की आशंका

Johar News Times
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रूटाइल (टाइटेनियम डाइऑक्साइड खनिज), गोल्डन रूटाइल क्वार्ट्ज और टाइटेनियम युक्त पत्थरों की अवैध निकासी की चर्चा; अंतरिक्ष, रक्षा और आभूषण उद्योग में है भारी मांग,

गुड़ाबांदा, पूर्वी सिंहभूम के गुड़ाबांदा क्षेत्र में एक बार फिर खनिज संपदा को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बार चर्चा कीमती रत्नों की नहीं, बल्कि रूटाइल नामक बहुमूल्य खनिज की है, जिसे खनिज जगत में “लाल सोना” या “काला सोना” भी कहा जाता है। आरोप है कि जंगलों और दुर्गम इलाकों में इस खनिज का अवैध खनन कर रात के अंधेरे में दूसरे राज्यों तक पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुड़ाबांदा के जंगलों और कथित गुप्त खदानों से रूटाइल पत्थर निकाला जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे बेहद कम कीमत पर खरीदकर बड़े शहरों और बाहरी बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इससे प्रशासनिक निगरानी और खनन नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

राजाबासा के जंगलों में अवैध खनन की सूचना
खनन विभाग को राजाबासा और आसपास के इलाकों में रूटाइल के अवैध खनन की जानकारी मिली है। सहायक खनन आयुक्त ज्योति शंकर सत्पथी ने कहा कि विभाग जल्द ही क्षेत्र का निरीक्षण करेगा और यदि अवैध गतिविधियां पाई जाती हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि रूटाइल एक अत्यंत मूल्यवान खनिज है, इसलिए पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी।

क्यों खास है रूटाइल?
रूटाइल मुख्य रूप से टाइटेनियम डाइऑक्साइड का प्राकृतिक खनिज है। यह लाल, भूरे, काले और सुनहरे रंग के चमकीले क्रिस्टल के रूप में पाया जाता है। जब यह क्वार्ट्ज के भीतर सुनहरे धागों जैसा दिखाई देता है, तो इसे “गोल्डन रूटाइल क्वार्ट्ज” भी कहा जाता है। इस खनिज का उपयोग अंतरिक्ष यान, रॉकेट, लड़ाकू विमान, परमाणु संयंत्र, उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, विशेष पेंट और सिरेमिक उद्योग में किया जाता है। वहीं आभूषण उद्योग और ज्योतिष में भी इसकी काफी मांग है।

सीमावर्ती इलाके बने तस्करी का रास्ता
सूत्रों के अनुसार भागाबेड़ा, छोटा आस्ती, जियान और राजाबासा क्षेत्र अवैध खनन और तस्करी के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे होने के कारण तस्कर जंगलों के रास्ते खनिज को पहले मयूरभंज ले जाते हैं, जहां से इसे कटक, भुवनेश्वर और कोलकाता जैसे शहरों तक पहुंचाया जाता है। जानकारी यह भी है कि अतीत में भागाबेड़ा और आसपास के क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा से जुड़े अंतरराज्यीय तस्करों को नकदी, वाहन और कीमती पत्थरों के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।

विभाग की नजर, कार्रवाई की तैयारी
रूटाइल की बढ़ती मांग और अवैध खनन की खबरों के बीच खनन विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में जांच अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। गुड़ाबांदा के जंगलों में बहुमूल्य खनिज की इस कथित तस्करी ने एक बार फिर प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और अवैध खनन पर नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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