ईचागढ़ में हाथी-मानव संघर्ष पर सियासत तेज, वनपाल के बयान से बढ़ा विवाद

ईचागढ़ में हाथी-मानव संघर्ष पर सियासत तेज, वनपाल के बयान से बढ़ा विवाद

Johar News Times
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सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ और चांडिल क्षेत्र में हाथी-मानव संघर्ष को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विधायक Savita Mahato के “हाथी को बांध कर नहीं रखा जा सकता” वाले बयान के बाद वन विभाग के स्थानीय अधिकारी की प्रतिक्रिया सामने आने से मामला चर्चा में आ गया है।

चांडिल वन क्षेत्र के वनपाल वसिष्ठ नारायण महतो ने कहा कि जंगली हाथियों की आवाजाही प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग लगातार ग्रामीणों की सुरक्षा और हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए अभियान चला रहा है। हालांकि, उन्होंने क्षेत्र में अवैध बालू खनन को भी बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि पर्यावरणीय असंतुलन और जंगलों पर दबाव बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं प्रभावित होती हैं।

इधर, विधायक सविता महतो ने हाल के दिनों में हाथी हमलों में प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है। क्षेत्र में बीते कुछ महीनों के दौरान हाथियों के हमले में कई लोगों की मौत और फसलों के नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं।

ईचागढ़ क्षेत्र में अवैध बालू खनन को लेकर भी प्रशासन की कार्रवाई जारी है। हाल ही में खनन विभाग द्वारा अवैध बालू परिवहन में लगे ट्रैक्टरों को जब्त किए जाने की सूचना सामने आई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथी समस्या, अवैध खनन और विस्थापन जैसे मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ चुके नेताओं को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

वन विभाग के वरीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभाग का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है। वहीं अवैध खनन पर कार्रवाई जिला प्रशासन और खनन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है।

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