गर्व के पल: झारखंड का पहला ‘मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री पंचायत’ बना केरूआडूंगरी, ‘मासिका महोत्सव’ में घोषणा

प्लास्टिक पैड को ना, रीयूजेबल पैड को हां; केरूआडूंगरी पंचायत ने पेश की मिसाल।

Johar News Times
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विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर घाटशिला क्षेत्र के बड़ा तालसा गांव में एक ऐतिहासिक “मासिका महोत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर केरूआडूंगरी पंचायत को झारखंड का पहला “मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री पंचायत” घोषित किया गया।

इस ऐतिहासिक अभियान के तहत पंचायत के सभी 11 गांवों — तुरामडीह, बड़ा तालसा, छोटा तालसा, केरूआडूंगरी, आहरघुटू, बाहरदाढ़ी, धोडांगा, हाकेगोडा, भीतरदाढ़ी, भूडरुडीह एवं भूरीडीह को पूरी तरह से मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री बनाया गया है।

चार वर्षों की कड़ी मेहनत का प्रेरणादायक परिणाम

आज इस पंचायत की सभी महिलाएं और किशोरियां पारम्परिक या प्लास्टिक वाले पैड को छोड़कर पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल ‘रीयूजेबल पैड’ का उपयोग कर रही हैं। यह अद्भुत सफलता केरूआडूंगरी पंचायत प्रशासन, सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन, प्रोजेक्ट बाला और स्थानीय महिला संगठनों के पिछले चार वर्षों के निरंतर जमीनी प्रयास और जागरूकता का सुखद परिणाम है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं जिला परिषद अध्यक्ष बारी मुर्मू ने पंचायत की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा:

“माहवारी स्वच्छता को लेकर आज भी समाज में झिझक है, ऐसे में जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। पूरे पंचायत को पर्यावरण अनुकूल और मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री बनाने की यह सोच बेहद अद्भुत और प्रेरणादायक है। केरूआडूंगरी पंचायत ने जो कर दिखाया है, वह पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है।”

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से तोड़ी चुप्पी की दीवार

महोत्सव के दौरान पंचायत की किशोरियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ और ओजस्वी भाषणों के माध्यम से माहवारी को लेकर समाज में फैली चुप्पी और पुरानी भ्रांतियों को तोड़ने का सशक्त संदेश दिया। मंच पर महिलाओं और किशोरियों ने इस अभियान से अपनी जिंदगी और सोच में आए सकारात्मक बदलाव के अनुभव भी साझा किए।

पंचायत के मुखिया और क्षेत्र में “पैड मैन” के नाम से मशहूर कान्हू मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा:

“माहवारी कोई शर्म या बीमारी नहीं, बल्कि एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। हमारा लक्ष्य सिर्फ पैड बांटना नहीं, बल्कि मासिक धर्म को लेकर समाज की रूढ़िवादी सोच को बदलना था। आज हमारे पंचायत की बेटियां और महिलाएं आत्मविश्वास के साथ इस विषय पर खुलकर बात कर रही हैं। यह पूरे पंचायत की सामूहिक जागरूकता की जीत है। अब हमारा प्रयास इस मॉडल को झारखंड के हर पंचायत तक पहुंचाना है।”

झारखंड के प्रसिद्ध सोशल आंत्रप्रेन्योर व निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार और माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने भी इस अभियान की रूपरेखा और इसके दूरगामी फायदों पर प्रकाश डाला।

अभियान को धरातल पर सफल बनाने और गांव-गांव में महिलाओं को जागरूक करने में सक्रिय योगदान देने वालीं सारोती हेंब्रम, माया हेंब्रम, प्रियंका गुरिया, रादाय हो, पानोसोती मार्डी, लक्ष्मी हेंब्रम, शकुन तियूं सहित लगभग दो दर्जन महिला स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं को मंच पर सम्मानित किया गया।

इस ऐतिहासिक महोत्सव में आकाश महतो, राकेश चंद्र मुर्मू, सुनील किस्कु, जोबा मार्डी, मनोज मुर्मू, धनमनी मार्डी, सुकलाल सरदार समेत पंचायत की सैकड़ों महिलाएं, युवतियां और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

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