ब्रिटेन की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी सरकार गहरे राजनीतिक संकट से घिर गई है। हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में पार्टी को मिली करारी शिकस्त और चर्चित ‘एपस्टीन फाइल्स’ विवाद में नाम सामने आने के बाद से प्रधानमंत्री स्टारमर पर पद छोड़ने का दबाव तेजी से बढ़ता जा रहा है।
अंदरूनी सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री स्टारमर ने अपने बेहद करीबी सहयोगियों से कहा है कि वह मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पद छोड़ने पर विचार कर सकते हैं और अपने अगले कदम का फैसला खुद करेंगे। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से उनके इस्तीफे की कोई घोषणा नहीं की गई है।
एपस्टीन फाइल्स विवाद और चुनावी हार ने बिगाड़ा खेल
इस पूरे संकट की पटकथा दो मुख्य वजहों से लिखी गई है:
- लेबर पार्टी के दिग्गज नेता पीटर मंडेलसन का नाम कुख्यात एपस्टीन फाइल्स से जुड़े मामलों में सामने आने के बाद ब्रिटिश जनता का भरोसा स्टारमर सरकार पर से पूरी तरह डगमगा गया है।
- गुरुवार को ब्रिटेन के 136 क्षेत्रों में हुए स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में सत्ताधारी लेबर पार्टी को करारा झटका लगा है। पार्टी ने अपनी 2,200 से अधिक काउंसिल (परिषद) सीटों में से लगभग 1,200 सीटें गंवा दी हैं।
चुनाव परिणामों ने ब्रिटेन के राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदल कर रख दिया है:
- रिफॉर्म यूके : इस चुनाव में सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी है, जिसने करीब 1,400 सीटों पर कब्जा जमाया है।
- लेबर पार्टी: भारी नुकसान के साथ मात्र 980 सीटों पर सिमट कर दूसरे स्थान पर आ गई है।
- अन्य पार्टियां: लिबरल डेमोक्रेट्स ने 834 और मुख्य विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने 754 सीटों पर जीत दर्ज की है।
वेल्स और स्कॉटलैंड में भी सूपड़ा साफ वेल्स में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां ‘प्लाइड सिमरू’ 43 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी और रिफॉर्म यूके 34 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। लेबर पार्टी यहाँ महज 9 सीटों पर सिमट गई। वहीं स्कॉटलैंड में ‘स्कॉटिश नेशनल पार्टी’ने 58 सीटें जीतीं, हालांकि वह भी बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर रह गई।
स्टारमर का फिलहाल इस्तीफे से इनकार: “देश को अस्थिरता में नहीं धकेलूँगा”
इन बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाले चुनावी नतीजों के बावजूद प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने तत्काल इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “मैं पद नहीं छोड़ूंगा। इस नाजुक मोड़ पर पद छोड़कर मैं देश को राजनीतिक अस्थिरता के दलदल में नहीं धकेल सकता।”
बहरहाल, लगातार हो रहे चुनावी नुकसान और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच कीर स्टारमर की कुर्सी पर खतरा लगातार मंडरा रहा है और आने वाले दिन ब्रिटिश राजनीति के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरे होने वाले हैं।
