झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य के हजारों संविदा, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मियों के स्थायीकरण (नियमितीकरण) को लेकर एक नया और ऐतिहासिक फॉर्मूला तैयार किया है। लंबे समय से सरकारी विभागों में सेवा दे रहे इन कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत भरी खबर है। नए नियम के तहत, संविदा और एकमुश्त पारिश्रमिक पर कार्यरत कर्मियों को नियमित होने के लिए एक विशेष प्रतियोगिता परीक्षा से गुजरना होगा। हालांकि, उनके वर्षों के कार्यानुभव (Work Experience) को सम्मान देते हुए परीक्षा में 0.15 प्रतिशत से लेकर अधिकतम 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त वेटेज (बोनस अंक) देने का प्रावधान किया गया है।
कार्मिक विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव, कम से कम 3 वर्ष की सेवा अनिवार्य
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस नीति का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है और अंतिम सहमति के लिए फाइल को वित्त और विधि विभाग (Finance and Law Department) के पास भेजा है। प्रस्ताव के मुताबिक, इस अतिरिक्त वेटेज का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने सरकारी सेवा में कम से कम 3 वर्ष (36 महीने) की निरंतर सेवा पूरी कर ली हो। सरकार के इस कदम से सचिवालय, क्षेत्रीय कार्यालयों, बोर्ड-निगमों और विभिन्न स्वायत्तशासी सरकारी संस्थानों में कार्यरत हजारों संविदा कर्मियों के नियमित होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
अनुभव के आधार पर इस तरह मिलेगा अतिरिक्त वेटेज (बोनस अंक):
सरकार ने सेवा की अवधि (महीनों में) के हिसाब से अंकों के वेटेज को वर्गीकृत किया है, जो इस प्रकार है:
| सेवा की कुल अवधि (महीनों में) | मिलने वाला अतिरिक्त वेटेज (प्रतिशत में) |
| 36 माह (3 वर्ष) की सेवा पर | 0.15% वेटेज |
| 37 से 40 माह की सेवा पर | 0.60% वेटेज |
| 60 माह (5 वर्ष) से अधिक की सेवा पर | 3.60% वेटेज |
| 120 से 136 माह (10 वर्ष से अधिक) की सेवा पर | 15% (अधिकतम) वेटेज |
सरकार का मानना है कि परीक्षा के साथ अनुभव का यह कॉम्बिनेशन लाने से मेधावी और लंबे समय से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी कर्मियों, दोनों को प्रतियोगिता परीक्षा में बराबरी का और बेहतर अवसर मिल सकेगा।
मनरेगा कर्मियों की 3 महीने लंबी हड़ताल समाप्त, काम पर लौटे कर्मचारी
इसी बीच, ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी एक और बड़ी राहत की खबर है। ‘झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ’ ने अपनी मांगों को लेकर गत 12 मार्च से चल रही राष्ट्रव्यापी सह राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल को 19 जून (2026) को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है।
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, मनरेगा आयुक्त और संघ के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच रांची में हुई एक उच्च स्तरीय मैराथन वार्ता के बाद यह गतिरोध टूटा।
वार्ता में इन प्रमुख मांगों पर बनी सहमति:
- ग्रेड पे का लाभ: जिन मनरेगा कर्मियों ने विभाग में 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है, उन्हें ग्रेड पे के दायरे में लाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।
- आश्रितों को अनुकंपा: सेवाकाल के दौरान दिवंगत हुए मनरेगा कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: सभी सक्रिय मनरेगा कर्मियों को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ के तहत मुफ्त चिकित्सा बीमा कवर से जोड़ा जाएगा।
इस लिखित समझौते और आश्वासन के बाद संघ ने अपनी हड़ताल वापस लेते हुए राज्य के सभी मनरेगा कर्मियों को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने काम पर लौटने का निर्देश जारी कर दिया है, जिससे ग्रामीण विकास की योजनाएं फिर से गति पकड़ सकेंगी।
