झारखंड सरकार ने राज्य के कंप्यूटर ऑपरेटरों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए एक बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। वित्त विभाग ने 7वें वेतन पुनरीक्षण के तहत इन पदों के लिए पे-लेवल-2 को मानक वेतनमान निर्धारित कर दिया है। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद वित्त विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक संकल्प भी जारी कर दिया है।
सरकार के इस कदम से अलग-अलग विभागों में ऑपरेटरों के वेतन में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियां दूर होंगी।
वेतनमान की असमानता होगी खत्म
अब तक राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में कंप्यूटर ऑपरेटर और डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्तियां नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से अलग-अलग नियमों के तहत की जा रही थीं। इसके कारण अलग-अलग विभागों में संविदा राशि अलग-अलग थी, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और वेतनमान में भारी असमानता थी। इसी विसंगति को पूरी तरह खत्म करने के लिए नया नियम बनाया गया है।
भविष्य की नियुक्तियों में दिखेगा बदलाव: क्या है पे-लेवल-2?
नए आदेश के अनुसार, वर्ष 2002 के दिशा-निर्देशों के तहत संविदा पर नियुक्त होने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर और डाटा एंट्री ऑपरेटर का मानक वेतनमान पे-लेवल-2 माना जाएगा।
- अपूर्व संशोधित वेतनमान: ₹5,200 से ₹20,200
- ग्रेड पे: ₹1,900
- फायदा: भविष्य में संविदा पर होने वाली सभी नई नियुक्तियों और संविदा राशि का निर्धारण इसी फिक्स्ड मानक के आधार पर किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में एकरूपता बनी रहेगी।
पुराने संविदाकर्मियों को राहत: वेतन में नहीं होगी कोई कटौती
सरकार ने वर्तमान में कार्यरत संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों के हितों की रक्षा करते हुए स्थिति स्पष्ट की है:
- वर्तमान में जो भी ऑपरेटर कार्यरत हैं, उन्हें उनकी वर्तमान संविदा अवधि पूरी होने तक पहले से तय वेतन और संविदा राशि मिलती रहेगी। उनके वेतन में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी।
- हालांकि, जब ये पुराने कर्मी पदमुक्त या सेवामुक्त होंगे, तो उनके खाली हुए पद स्वतः पे-लेवल-2 के दायरे में आ जाएंगे और उन पर होने वाली नई नियुक्तियां इसी नए स्केल पर की जाएंगी।
कनीय सचिवालय सहायक के समान माना गया कार्य
इस फैसले के पीछे का तर्क देते हुए सरकार ने कहा कि कंप्यूटर ऑपरेटर और डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा किए जाने वाले कार्य की प्रकृति कनीय सचिवालय सहायक और निम्न वर्गीय लिपिक के समान ही है। चूंकि उनके कार्य का स्तर समान है, इसलिए उनके वेतनमान में भी समानता लाने के उद्देश्य से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।
