सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। बहुउद्देशीय परियोजना के तहत बने चांडिल डैम जलाशय का जलस्तर अचानक बढ़ने से दर्जनों गांवों के किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। रबी सीजन के तहत खेतों में लहलहा रही और कटाई के लिए पूरी तरह तैयार धान की फसल जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
इन गांवों में मचा हाहाकार
डैम का पानी बढ़ने से रसुनिया पंचायत के रुआनी टोला, पिलायडीह, हाथीनादा, रसुनिया सहित हेवन पंचायत, काशीपुर, कल्याणपुर, धातकीडीह, अंडा, हुटू, ओड़िया और गुंडा पंचायत के लावा, सीमा, गुंडा जैसे दर्जनों गांवों के खेत पूरी तरह डूब गए हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले दो दिनों से इलाके में हो रही लगातार बारिश के कारण डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ा। लेकिन किसानों का आरोप है कि डैम प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के जलस्तर को बढ़ने दिया। रसुनिया निवासी पीड़ित किसान जगन्नाथ मार्डी ने रोते हुए कहा, “हमारी सालभर की मेहनत और खून-पसीने की कमाई एक झटके में डूब गई। अगर प्रशासन पहले सूचित कर देता, तो हम समय रहते फसल काट लेते।”
चांडिल वन क्षेत्र के किसान लंबे समय से जंगली हाथियों के आतंक से जूझ रहे हैं। हाथियों के झुंड से किसी तरह अपनी फसलों को बचाकर गरीब किसानों ने गर्मी के इस मौसम में रबी धान की खेती की थी। लेकिन अब डैम के बैकवाटर ने उनकी बची-कुची उम्मीदों को भी मटियामेट कर दिया है।
किसानों ने अपनी लागत का दर्द बयां करते हुए बताया कि:
- रबी धान के उत्पादन में प्रति एकड़ करीब 20,000 से 22,000 रुपये का खर्च आता है।
- इसमें 400 रुपये किलो का महंगा धान बीज, खाद, कीटनाशक दवाएं, ट्रैक्टर से जुताई, रोपनी और कटाई की मजदूरी शामिल है।
- अब कटाई से ठीक पहले पानी घुसने के कारण धान के पौधे खेतों में ही सड़ने की कगार पर पहुंच गए हैं।
मुआवजे की मांग, उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस आपदा से आक्रोशित ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन से चांडिल डैम प्रबंधन की इस लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कराने और प्रभावित किसानों को तुरंत उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि चांडिल डैम का रेडियल गेट खोलकर पानी कम नहीं किया गया और किसानों को राहत नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
