महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में ही झारखंड का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अप्रैल 2026 के लिए राज्य को करीब 1 करोड़ 20 लाख मानव दिवस (मैन-डेज) सृजित करने का लक्ष्य दिया था, लेकिन राज्य केवल 6 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल कर सका। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पूरे अप्रैल महीने में सिर्फ करीब 7 लाख 20 हजार मानव दिवस ही सृजित हो पाए। कम उपलब्धि को लेकर ग्रामीण विकास विभाग ने गंभीर नाराजगी जताई है। विभागीय समीक्षा में कहा गया कि कई जिलों और प्रखंडों में मजदूरों की मोबिलाइजेशन कमजोर रही और योजनाओं के संचालन में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। पंचायत स्तर पर योजनाओं की सुस्ती और समय पर कार्य शुरू नहीं होने से बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरों को रोजगार नहीं मिल सका।
सूत्रों के मुताबिक अप्रैल में मनरेगा मजदूरों की हड़ताल का असर भी योजनाओं पर साफ दिखाई पड़ा। कई जगह मजदूर काम पर नहीं पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में श्रमिकों ने काम की मांग भी नहीं की। इसका असर पंचायत और प्रखंड स्तर पर योजनाओं की रफ्तार पर पड़ा। ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि मई 2026 में हर हाल में 100 प्रतिशत मानव दिवस सृजन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों को गांव स्तर पर विशेष अभियान चलाकर मजदूरों को काम से जोड़ने और लंबित योजनाओं को तेजी से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई प्रखंडों में योजनाओं की पूर्व तैयारी कमजोर रही। कार्यस्थलों के चयन, मजदूरों की सूची तैयार करने और मांग आधारित कार्य आवंटन में लापरवाही बरती गई। विभाग ने प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों को प्रतिदिन कार्य प्रगति की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों और मजदूर परिवारों के लिए रोजगार का सबसे बड़ा माध्यम है। ऐसे में मानव दिवस सृजन में कमी सीधे तौर पर मजदूरों की आय और आजीविका को प्रभावित करती है। मई महीने में विशेष रणनीति के साथ काम कर लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया गया है।
