क्या आपका बच्चा भी बात-बात पर होता है नाराज? जानें इसके पीछे के ज्योतिषीय कारण और शांत करने के उपाय

बच्चे की कुंडली के सटीक विश्लेषण और सही समाधान के लिए किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

Johar News Times
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अक्सर माता-पिता बच्चों के जिद्दीपन और गुस्से से परेशान रहते हैं। कई बार अच्छी परवरिश और शांत माहौल मिलने के बाद भी बच्चों में आक्रामकता देखी जाती है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, बच्चों के इस व्यवहार के पीछे उनके जन्म के समय ग्रहों की विशेष चाल और नक्षत्रों की स्थिति भी जिम्मेदार होती है।

ज्योतिष विज्ञान मानता है कि हर शिशु अपनी एक मूल प्रकृति (नैसर्गिक स्वभाव) के साथ जन्म लेता है, जो समय के साथ और गहरी होती जाती है। आइए जानते हैं कि कुंडली के कौन से ग्रह बच्चे को उग्र बनाते हैं और इन्हें शांत करने के क्या तरीके हैं।

इन ग्रहों के प्रभाव से बढ़ता है बच्चों में गुस्सा और जिद्दीपन

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति के स्वभाव को समझने के लिए कुंडली के दो प्रमुख भावों को देखा जाता है:

  1. प्रथम भाव (लग्न भाव): यह व्यक्ति के मूल स्वभाव, व्यक्तित्व और शारीरिक-मानसिक प्रकृति को दर्शाता है।
  2. पंचम भाव: यह बुद्धि, विवेक और सोचने की क्षमता का स्थान होता है।

जब इन भावों पर क्रूर या तामसिक ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, तो व्यवहार में बदलाव आता है:

  • मंगल और सूर्य का प्रभाव: मंगल को साहस और आक्रामकता का कारक माना जाता है, जबकि सूर्य अहंकार को बढ़ाता है। यदि कुंडली में इनका नकारात्मक प्रभाव हो, तो बच्चा बात-बात पर गुस्सा करने लगता है।
  • राहु की भूमिका: राहु को तामसिक और भ्रम पैदा करने वाला ग्रह माना गया है। इसकी अशुभ स्थिति से बच्चे अनियंत्रित और ज्यादा शरारती हो जाते हैं।
  • कमजोर चंद्रमा और गुरु: चंद्रमा मन का और गुरु विवेक का कारक है। जब मंगल या राहु के कारण चंद्रमा और गुरु कमजोर होते हैं, तो बच्चे का खुद पर नियंत्रण नहीं रहता।

व्यवहार में सुधार के लिए अपनाएं ये 3 सरल ज्योतिषीय उपाय

चूंकि हर बच्चे की कुंडली अलग होती है, इसलिए उनके उपाय भी भिन्न हो सकते हैं। लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसे सामान्य और प्रभावी उपाय बताए गए हैं जो बच्चों के मन को शांत करने में मदद करते हैं:

  • मानसिक शांति के लिए चंदन: बच्चे के उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए उसके माथे पर नियमित रूप से सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इससे चंद्रमा मजबूत होता है और मन में शीतलता आती है।
  • मंगल के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए: अगर बच्चा बहुत ज्यादा तोड़-फोड़ या जिद करता है, तो मंगलवार के दिन उसके हाथ से लाल मसूर की दाल का दान किसी गरीब को करवाएं।
  • एकाग्रता और बुद्धि विकास के लिए: बुधवार के दिन बच्चे के हाथों से भगवान गणेश को बूंदी के दो लड्डुओं का भोग लगवाएं। इससे बुध ग्रह अनुकूल होता है और बच्चे में सही-गलत को समझने की बुद्धि आती है।

ये उपाय सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। बच्चे की कुंडली के सटीक विश्लेषण और सही समाधान के लिए किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

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