झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए जून में होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव प्रक्रिया का शेड्यूल जारी होने के बावजूद अब तक सत्तारूढ़ महागठबंधन की ओर से उम्मीदवारों के नाम पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसी बीच कांग्रेस ने एक सीट पर अपनी दावेदारी खुलकर पेश कर दी है, जिससे झामुमो पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि राज्यसभा सीटों को लेकर अंतिम निर्णय महागठबंधन के शीर्ष नेतृत्व को लेना है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी चाहती है कि दो सीटों में से एक सीट कांग्रेस को मिले। उन्होंने कहा कि गठबंधन में कांग्रेस का एक सीट पर हक बनता है और मौजूदा संख्या बल के आधार पर महागठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और एआईसीसी सदस्य राजेश ठाकुर ने भी इस मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में सभी दलों का बराबर महत्व है और राज्यसभा की एक सीट पर कांग्रेस का स्वाभाविक अधिकार बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि झामुमो, कांग्रेस, राजद और माले की एकजुटता दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित कर सकती है।
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोट जरूरी हैं। वर्तमान में इंडिया ब्लॉक यानी महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं। ऐसे में यदि गठबंधन एकजुट रहता है तो दोनों सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
दूसरी ओर एनडीए के पास भाजपा के 21, जदयू के 1, आजसू के 1 और लोजपा (रामविलास) के 1 विधायक सहित कुल 24 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए भी पर्याप्त नहीं माने जा रहे। अब राज्यसभा चुनाव को लेकर सबकी नजरें महागठबंधन के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं, जिन्हें सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम फैसला लेना है।
