भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन: डिग्री कॉलेज महेशपुर में 20-21 मई को राष्ट्रीय सेमिनार

भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन: डिग्री कॉलेज महेशपुर में 20-21 मई को राष्ट्रीय सेमिनार

Johar News Times
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महेशपुर (पाकुड़): डिग्री महाविद्यालय महेशपुर में 20 एवं 21 मई 2026 को “भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं एनईपी 2020: संभावनाएं एवं चुनौतियां” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन झारखंड राज्य उच्च शिक्षा परिषद एवं उच्च तकनीकी शिक्षा सेवा आयोग, झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा।

सेमिनार में देश के विभिन्न हिस्सों से प्रोफेसर, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों के व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख वक्ताओं में पांडिचेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर (डॉ.) बशीर अहमद खान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) ब्रजेश कुमार सिंह, मिल्लत कॉलेज दरभंगा के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. बीरेंद्र कुमार मिश्रा तथा रोहतास महिला कॉलेज सासाराम के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमन मुर्मू शामिल होंगे।

सेमिनार के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों एवं शोधार्थियों के साथ अकादमिक विमर्श किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नई शैक्षणिक दृष्टि और मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

महाविद्यालय जुलाई 2024 से प्रारंभ हुआ नया संस्थान है। पाकुड़ जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार का आयोजन महाविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मो. मसूद अहमद सेमिनार के अध्यक्ष हैं। वहीं डॉ. शैलेश मिश्रा (समाजशास्त्र विभाग) कन्वेनर, प्रणव राज (अंग्रेजी विभाग) को-कन्वेनर, डॉ. राकेश कुमार दास (मनोविज्ञान विभाग) आयोजक सचिव तथा अमित कुमार सोरेंग (हिंदी विभाग) कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके अलावा प्रो. सामु सुमन हांसदा, प्रो. जितेंद्र कुमार रजक, प्रो. पिंटु कुमार, डॉ. रामचंद्र राणा एवं महाविद्यालय के सभी कर्मचारियों का सहयोग आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कन्वेनर डॉ. शैलेश मिश्रा ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) के महत्व को देखते हुए यूजीसी ने एनईपी 2020 के अंतर्गत इसे विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा पद्धति में बढ़ते पश्चिमी प्रभाव के बीच भारतीय सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को संरक्षित रखने की आवश्यकता है। पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक शिक्षा का समन्वय वर्तमान समय की मांग है।

महाविद्यालय प्रशासन एवं आयोजन समिति ने महेशपुर एवं पाकुड़ जिले के शिक्षकों, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों एवं आम नागरिकों से राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।

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