रांची: राज्य के 24 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षाओं, परिणामों और प्रमाणपत्रों की जिम्मेदारी संभालने वाली झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रही है। परिषद में चेयरमैन को छोड़ अधिकांश महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं या अतिरिक्त प्रभार के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा है।
जैक में सचिव का पद पिछले 10 दिनों से खाली है, जबकि उपाध्यक्ष का पद करीब 18 महीने से रिक्त पड़ा हुआ है। दो संयुक्त सचिवों में एक पद लगभग ढाई वर्ष से खाली है और दूसरे पद पर अधिकारी अतिरिक्त प्रभार में कार्य कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति परीक्षा नियंत्रक के पद की है, जो पिछले आठ वर्षों से भरा ही नहीं गया है, जबकि इसका स्पष्ट प्रावधान अधिनियम में मौजूद है।
इन रिक्तियों का असर परिषद के दैनिक कामकाज पर साफ दिखाई देने लगा है। 16 जून से प्रस्तावित मध्यमा और मदरसा परीक्षाओं की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। कई विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते जैक को इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 12 जून तक करनी पड़ी है। इसके अलावा स्क्रूटनी, अंक सत्यापन, प्रमाणपत्र वितरण, विद्यालयों की मान्यता तथा कक्षा 8, 9 और 11 की विशेष परीक्षाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हुए हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के बाद पुनर्मूल्यांकन की मांग करने वाले छात्रों के आवेदन भी लंबित पड़े हैं।
इस बीच वित्तरहित संघर्ष मोर्चा और शिक्षक संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। मोर्चा के अध्यक्ष फजलुल कदीर अहमद और रघुनाथ सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर जैक में सचिव की नियुक्ति नहीं की गई तो 16 जून को झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी। संगठनों ने यह भी घोषणा की है कि 12 जून को राज्यभर के प्राचार्यों, प्रधानाचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा का कहना है कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में हो रही देरी का सीधा नुकसान लाखों छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को अविलंब रिक्त पदों को भरकर जैक के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना चाहिए।
