झारखंड के पलामू जिले से NEET-UG परीक्षा के दौरान प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। मेदिनीनगर स्थित योध सिंह नामधारी महिला महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर अव्यवस्था के कारण 48 परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया। प्रश्नपत्रों की कमी की वजह से इन छात्रों की परीक्षा निर्धारित समय के बजाय घंटों देरी से शुरू हुई और रात करीब 9:55 बजे संपन्न हुई।
क्या है पूरा मामला?
रविवार को आयोजित NEET-UG परीक्षा के दौरान इस केंद्र पर कुल 360 परीक्षार्थी शामिल होने पहुंचे थे। परीक्षा शुरू होने के समय जब प्रश्नपत्र बांटे जा रहे थे, तब कक्ष संख्या 11 में बैठे 48 छात्रों को पता चला कि उनके लिए प्रश्नपत्र उपलब्ध ही नहीं हैं। इस कमरे के सभी छात्र हिंदी माध्यम के थे और केंद्र पर हिंदी मीडियम के प्रश्नपत्रों की कमी पाई गई।
छात्रों का हंगामा और तनाव की स्थिति
करीब डेढ़ घंटे तक प्रश्नपत्र का इंतजार करने के बाद छात्रों का सब्र टूट गया और उन्होंने केंद्र पर ही हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों और अभिभावकों ने कॉलेज प्रबंधन और जिला प्रशासन पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी साल भर की मेहनत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थिति इस कदर बिगड़ गई कि केंद्र पर मारपीट और तीखी नोकझोंक की खबरें भी सामने आईं।
रात 10 बजे तक चली परीक्षा
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को शांत कराया और अतिरिक्त प्रश्नपत्रों की व्यवस्था की।
- परीक्षा की शुरुआत: शाम 06:55 बजे
- परीक्षा की समाप्ति: रात 09:55 बजे
सदर एसडीओ सुलोचना मीणा ने बताया कि प्रश्नपत्र कम होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई। देर रात परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा बस की सुविधा दी गई और उनके लिए जलपान का भी प्रबंध किया गया।
स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
हंगामे और तनाव के बीच एक छात्रा की तबीयत बिगड़ने की भी सूचना मिली, जिसके बाद रात करीब 7:30 बजे डॉ. रिद्धि को केंद्र पर बुलाया गया। फिलहाल केंद्र पर पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में है।
इस घटना ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और स्थानीय परीक्षा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्रों की संख्या को लेकर इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है?










