पलामू प्रमंडल में जमीन के अवैध कारोबार और उससे जुड़े अपराधों पर अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। डीआईजी किशोर कौशल ने गढ़वा, पलामू और लातेहार जिलों के एसपी को एक सप्ताह के भीतर सक्रिय भू-माफियाओं की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसे अब तक का सबसे बड़ा ‘मिशन मोड’ अभियान माना जा रहा है।
गढ़वा सहित पूरे प्रमंडल में इस आदेश के बाद पुलिस सक्रिय हो गई है। रणनीति के तहत अब केवल छोटे दलालों पर नहीं, बल्कि जमीन सिंडिकेट चलाने वाले मास्टरमाइंड पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। हाल के दिनों में जमीन विवाद को लेकर फायरिंग और हत्या जैसी घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ रसूखदार लोग पर्दे के पीछे से अपराधियों को फंडिंग कर रहे हैं।
पुलिस अब ऐसे तत्वों के मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही है। तीनों जिलों की पुलिस संयुक्त समन्वय के साथ छापेमारी करेगी, ताकि किसी भी माफिया को भागने का मौका न मिले।
तीन श्रेणियों में तैयार हो रही सूची
पुलिस भू-माफियाओं को अपराध की गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांट रही है—
- श्रेणी-ए (हाई रिस्क): संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े बड़े माफिया
- श्रेणी-बी (मिड लेवल): सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले और बिचौलिये
- श्रेणी-सी (एजेंट): जमीन चिह्नित करने वाले छोटे सहयोगी
इन गतिविधियों पर विशेष नजर
- फर्जी खतियान और डीड बनाकर जमीन हड़पने वाले
- जमीन विवाद को हिंसक संघर्ष में बदलने वाले
- पर्दे के पीछे से फंडिंग करने वाले फाइनेंसर
डीआईजी किशोर कौशल ने साफ कहा है कि रिपोर्ट मिलते ही चिन्हित माफियाओं के खिलाफ सीसीए और गैंगस्टर एक्ट जैसी सख्त धाराओं में कार्रवाई होगी। उन्होंने दोहराया कि जमीन विवाद के नाम पर रंगदारी और हिंसा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।










