सावधान! सेहत के नाम पर कहीं आप ‘ज़हर’ तो नहीं खा रहे? ऐसे पहचानें नकली और केमिकल वाले फल

Johar News Times
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आजकल फिट रहने के लिए हर कोई अपनी डाइट में फलों को शामिल कर रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाज़ार से खरीदे गए ये सुंदर और चमकदार फल आपकी सेहत बना नहीं, बल्कि बिगाड़ रहे हैं? फल पकाने से लेकर उन्हें ताज़ा दिखाने तक, अब बाज़ार में बड़े पैमाने पर रसायनों का खेल चल रहा है। खासकर गर्मियों के इस सीज़न में फलों की मांग बढ़ने के कारण मिलावट का खतरा और भी बढ़ गया है।

फलों में कैसे की जा रही है मिलावट?

  • खतरनाक कैल्शियम कार्बाइड: आम, केला और पपीता जैसे फलों को समय से पहले पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल होता है। यह केमिकल फलों को बाहर से तो पीला और पका हुआ बना देता है, लेकिन फल अंदर से कच्चे रह जाते हैं। ऐसे फल खाने से फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द और सिरदर्द जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
  • वैक्स की कोटिंग: सेब और अन्य फलों को हफ्तों तक ताज़ा और आकर्षक दिखाने के लिए उन पर मोम (Wax) की परत चढ़ा दी जाती है। यह वैक्स पेट में जाकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
  • सिंथेटिक डाई और रंग: अनार, तरबूज और सेब को गहरा लाल दिखाने के लिए उनमें कृत्रिम रंगों या इंजेक्शन का सहारा लिया जाता है। ये रंग शरीर में एलर्जी और अन्य त्वचा संबंधी रोगों को जन्म देते हैं।
  • केमिकल पॉलिश: सड़े-गले या पुराने फलों को नया जैसा दिखाने के लिए उन पर केमिकल पॉलिश की जाती है, जिससे ग्राहक धोखा खा जाते हैं।

खुद को और परिवार को कैसे बचाएं?

  1. पानी का सही उपयोग: फल खरीदने के बाद उन्हें कम से कम 15-20 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रखें। सख्त फलों को हल्के गुनगुने पानी से धोना बेहतर होता है।
  2. दिखावे पर न जाएं: अगर कोई फल ज़रूरत से ज़्यादा चमकदार या एक ही समान रंग का दिख रहा है, तो समझ लें कि उसमें गड़बड़ी हो सकती है। कुदरती तौर पर पके फलों का रंग थोड़ा असमान हो सकता है।
  3. लोकल और सीजनल पर भरोसा: हमेशा मौसमी (Seasonal) और स्थानीय स्तर पर उगने वाले फल ही खरीदें। कोल्ड स्टोरेज में रखे बिना मौसम वाले फलों में रसायनों की मात्रा अधिक होती है।
  4. छिलका उतारकर खाएं: यदि संभव हो, तो फलों का छिलका उतारकर ही सेवन करें ताकि बाहरी रसायनों का प्रभाव कम हो सके।
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