पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित नाकेबंदी के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की।
क्या-क्या मुद्दे उठे?
- दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर विस्तार से चर्चा हुई, खासकर ईरान, लेबनान और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा चुनौतियों को लेकर।
- गिदोन सार ने स्पष्ट कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
- उन्होंने यह भी जोर दिया कि समुद्री मार्गों पर “Freedom of Navigation” बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि इसमें बाधा आने से वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है।
भारत की सक्रिय कूटनीति
इसी बीच डॉ. जयशंकर ने अन्य देशों के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत कर स्थिति का आकलन किया—
- कुवैत के विदेश मंत्री के साथ बातचीत में वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई।
- सिंगापुर के विदेश मंत्री के साथ भी पश्चिम एशिया संकट और उसके वैश्विक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की नाकेबंदी या तनाव:
- वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है
- भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है
कुल मिलाकर
यह बातचीत सिर्फ दो देशों के बीच औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि बढ़ते भू-राजनीतिक संकट के बीच रणनीतिक समन्वय का संकेत है। भारत लगातार संतुलित कूटनीति अपनाते हुए क्षेत्र में शांति,










