सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस पर संकट के बादल, फंड की कमी से वेतन अटका; कर्मचारी छोड़ रहे नौकरी

सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस पर संकट के बादल, फंड की कमी से वेतन अटका; कर्मचारी छोड़ रहे नौकरी

Johar News Times
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रांची: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी आदर्श विद्यालय योजना के नवीनीकरण में हो रही देरी का असर अब सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के संचालन पर साफ दिखने लगा है। राज्य के 80 स्कूल नियमित फंड के अभाव में वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, जिससे शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

छह माह से वेतन का इंतजार
फंड की कमी का सबसे बड़ा असर स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ा है। करीब 30 स्कूल मैनेजर, 240 अन्य कर्मी और राज्य स्तरीय पीएमयू अधिकारी पिछले छह माह से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। लगातार वेतन नहीं मिलने से कई कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, बोकारो और गोड्डा समेत कई जिलों के स्कूल मैनेजर नौकरी छोड़ चुके हैं, जबकि अन्य भी वैकल्पिक रोजगार की तलाश में हैं।

छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
वित्तीय संकट का असर विद्यार्थियों तक पहुंचने लगा है। हाल ही में नौवीं और 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था करने में कठिनाई आई। बाद में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने दूसरे मद से करीब 1.20 करोड़ रुपये उपलब्ध कराकर पुस्तक आपूर्ति सुनिश्चित कराई। सीबीएसई से संबद्ध होने के कारण इन विद्यालयों में परीक्षा, पुस्तक वितरण और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को समय पर पूरा करना अनिवार्य है, लेकिन संसाधनों की कमी लगातार चुनौती बन रही है।

विस्तार की योजना, लेकिन पुराने स्कूलों का भविष्य अनिश्चित
एक ओर सरकार 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से संचालित 80 स्कूलों के लिए योजना का नवीनीकरण लंबित है। इससे इन विद्यालयों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों के अनुसार, योजना को आगे बढ़ाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी है। मंजूरी मिलने तक स्कूलों के संचालन, फंडिंग और कर्मचारियों के भुगतान को लेकर अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है।

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