झारखंड में पुराने टैक्स विवादों के निपटारे की तैयारी, सरकार ने मांगे सुझाव

झारखंड में पुराने टैक्स विवादों के निपटारे की तैयारी, सरकार ने मांगे सुझाव

Johar News Times
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रांची: झारखंड सरकार का वाणिज्य कर विभाग पुराने बकाया कर मामलों के समाधान के लिए ‘झारखंड कराधान अधिनियमों की बकाया राशि का समाधान अधिनियम, 2026’ लाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित कानून का प्रारूप जारी कर विभाग ने व्यापारियों, करदाताओं और अन्य हितधारकों से 19 जून तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। यह अधिनियम जीएसटी से पहले के कर मामलों के निपटारे के लिए लाया जा रहा है। इसके दायरे में सेल्स टैक्स, सीएसटी, वैट, बिजली शुल्क, लक्जरी टैक्स, विज्ञापन कर, प्रोफेशनल टैक्स, मनोरंजन कर और प्रवेश कर से जुड़े लंबित मामले शामिल होंगे।

ब्याज और जुर्माने में बड़ी राहत का प्रस्ताव
प्रारूप के अनुसार, स्वीकृत कर बकाया मामलों में मूल कर राशि जमा करने पर ब्याज और जुर्माने में 95 प्रतिशत तक छूट मिलेगी। वहीं 30 जून 2017 तक के आकलित बकाया मामलों में केवल 30 प्रतिशत कर राशि जमा कर 70 प्रतिशत तक राहत पाने का प्रावधान रखा गया है। घोषणा पत्र और प्रमाण-पत्र संबंधी मामलों में 35 प्रतिशत राशि जमा करने पर 65 प्रतिशत राशि माफ की जा सकेगी।

90 दिनों के भीतर करना होगा आवेदन
अधिनियम लागू होने के बाद करदाताओं को 90 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। विशेष परिस्थितियों में वाणिज्य कर आयुक्त आवेदन की अवधि अधिकतम 30 दिन तक बढ़ा सकेंगे। प्रत्येक कर आदेश के लिए अलग आवेदन देना होगा और लंबित अपील या याचिका की जानकारी भी देनी होगी।

अधिकारियों के स्तर पर होगा निपटारा

  • 5 लाख रुपये तक के मामलों का निपटारा राज्य कर पदाधिकारी करेंगे।
  • 10 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई सहायक आयुक्त करेंगे।
  • 50 लाख रुपये तक के मामले उप आयुक्त स्तर पर निपटाए जाएंगे।
  • 50 लाख रुपये से अधिक के मामलों का निपटारा संयुक्त आयुक्त करेंगे।

विभाग का कहना है कि सुझावों की समीक्षा के बाद मसौदे में संशोधन कर इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पूरे राज्य में लागू होगा।

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