भोजन और पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे गजराज, वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की दी सलाह
सरायकेला-खरसावां: जिले के चांडिल, कुकड़ू और तमाड़ से सटे वन क्षेत्रों में इन दिनों जंगली हाथियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। पिछले कुछ दिनों से हाथियों के विभिन्न झुंडों को सालगाडीह, शहनडीह, पलासडीह, दरुदा तथा आसपास के ग्रामीण इलाकों में विचरण करते देखा गया है। हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल है और कई गांवों में लोग रात के समय रतजगा करने को मजबूर हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का झुंड खेतों और बागानों की ओर बढ़ रहा है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही है और ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, रात में अकेले बाहर नहीं निकलने तथा किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को देने की अपील की गई है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं के पीछे जंगलों पर बढ़ता दबाव, प्राकृतिक जल स्रोतों का कम होना तथा हाथी कॉरिडोर में बाधाएं प्रमुख कारण हैं। हाल के वर्षों में चांडिल और दलमा क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है, जिसके मद्देनजर वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था भी विकसित कर रहा है। हाल ही में चांडिल और दलमा क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए एआई आधारित थर्मल कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की निगरानी बढ़ाने, प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित सूचना प्रणाली लागू करने तथा फसल नुकसान की स्थिति में शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं विभाग का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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