राज्यसभा चुनाव: हेमंत-खरगे की बातचीत से तेज हुई सियासी हलचल, आज हो सकता है महागठबंधन उम्मीदवार का ऐलान

राज्यसभा चुनाव: हेमंत-खरगे की बातचीत से तेज हुई सियासी हलचल, आज हो सकता है महागठबंधन उम्मीदवार का ऐलान

Johar News Times
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रांची, झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को अधिसूचना जारी होने के बावजूद पहले दिन किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन पत्र नहीं खरीदा, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में रणनीतिक बैठकों और चर्चाओं का दौर चलता रहा। महागठबंधन की ओर से पहली सीट पर झामुमो का उम्मीदवार उतारना लगभग तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच सोमवार को फोन पर बातचीत हुई, जिसमें राज्यसभा चुनाव और जीत की रणनीति पर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि झामुमो मंगलवार को अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकता है।

दूसरी सीट पर बनी हुई है सबसे ज्यादा नजर

राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा दूसरी राज्यसभा सीट को लेकर है। कांग्रेस लगातार इस सीट पर अपना दावा मजबूत करने में जुटी है और महागठबंधन के भीतर इस पर अंतिम सहमति बनने का इंतजार है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को इस संबंध में अंतिम फैसला ले सकते हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने मुख्यमंत्री से हुई बातचीत की जानकारी कांग्रेस नेतृत्व को दी, जिसके बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सीधे हेमंत सोरेन से चर्चा की। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

झामुमो उम्मीदवार को लेकर कई नाम चर्चा में

यदि झामुमो सोरेन परिवार से किसी सदस्य को राज्यसभा भेजने का फैसला करता है तो मुख्यमंत्री की बहन अंजनी सोरेन का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं परिवार से बाहर उम्मीदवार चुनने की स्थिति में झामुमो महासचिव विनोद पांडे मजबूत दावेदार बताए जा रहे हैं।

भाजपा भी सक्रिय, ‘मैजिक 28’ पर फोकस

उधर भाजपा ने भी राज्यसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अदित्य साहु ने दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर संभावित उम्मीदवारों और समर्थन जुटाने की रणनीति पर चर्चा की।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास वर्तमान में 24 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी अतिरिक्त समर्थन जुटाने के विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार का दिन राज्यसभा चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ कर सकता है, खासकर महागठबंधन की दूसरी सीट को लेकर जारी असमंजस पर।

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