ब्यूटी प्रोडक्ट्स से लेकर दवाओं तक: आपकी पसंदीदा एंटी-एजिंग क्रीम और सिरप में छुपा है ‘कॉकरोच का अर्क’!

क्या आप जानते हैं कि जिस जीव को आप देखना भी पसंद नहीं करते, वह आपकी महंगी एंटी-एजिंग क्रीम, फेस वॉश और मॉइस्चराइजर का एक मुख्य हिस्सा हो सकता है?

Johar News Times
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जब भी घर के किसी कोने में कॉकरोच (तिलचट्टा) नजर आता है, तो ज्यादातर लोग डरकर या घिन खाकर दूर भाग जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस जीव को आप देखना भी पसंद नहीं करते, वह आपकी महंगी एंटी-एजिंग क्रीम, फेस वॉश और मॉइस्चराइजर का एक मुख्य हिस्सा हो सकता है?

जी हां, यह बिल्कुल सच है। आज की तारीख में ग्लोबल ब्यूटी और हेल्थ इंडस्ट्री में कॉकरोच से निकलने वाले तत्वों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स से लेकर घाव भरने वाले मेडिकल सिरप और बायोटेक रिसर्च तक, अमेरिकन कॉकरोच को विज्ञान की दुनिया में एक ‘जैविक खजाना’ माना जा रहा है।

खास बातें

  • स्किनकेयर में डिमांड: कॉकरोच के खास केमिकल त्वचा को जवां रखने के लिए महंगे ब्यूटी ब्रांड्स की पहली पसंद बन रहे हैं।
  • एंटी-एजिंग गुण: इसके पेप्टाइड्स और अमीनो एसिड्स इंसानी त्वचा में कोलेजन का उत्पादन तेजी से बढ़ाते हैं।
  • मेडिकल यूज: पारंपरिक चीनी चिकित्सा के साथ-साथ घाव भरने वाले आधुनिक मेडिकल जेल और सिरप में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
  • फ्यूचर फूड: कॉकरोच की एक विशेष प्रजाति से मिलने वाले मिल्क क्रिस्टल्स का उपयोग भविष्य में हाई-प्रोटीन सप्लीमेंट्स के लिए किया जा सकता है।

स्किनकेयर और एंटी-एजिंग प्रोडक्ट्स में कमाल

तिलचट्टे के अर्क का सबसे ज्यादा इस्तेमाल त्वचा से जुड़े प्रोडक्ट्स में किया जा रहा है। भारत में पाए जाने वाले अमेरिकन कॉकरोच की प्रजाति से ऐसा फेस वॉश, फेशियल मास्क और टोनर तैयार होता है जो त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज और रिपेयर करता है। इसके भीतर मौजूद तत्व त्वचा की ऊपरी परत को फटने से बचाते हैं, ओपन पोर्स (खुले रोमछिद्रों) को कम करते हैं और स्किन टेक्सचर में सुधार लाते हैं। इसके अलावा, इसके अर्क में सन-स्क्रीन जैसे गुण भी पाए गए हैं जो धूप से त्वचा की रक्षा करते हैं।

चिटिन और चिटोसन का चमत्कारी असर

वैज्ञानिकों के मुताबिक, कॉकरोच के शरीर में ‘चिटिन’ (Chitin) और ‘चिटोसन’ (Chitosan) नाम के दो बेहद फायदेमंद तत्व मौजूद होते हैं। ये दोनों ही तत्व डैमेज्ड स्किन को तेजी से ठीक करने और किसी भी तरह के घाव को बहुत जल्दी भरने की क्षमता रखते हैं। एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी एजेंट होने के कारण यह चेहरे की सूजन और लालिमा (Redness) को कम करने में बेहद असरदार साबित होता है।

मेकअप और हेयर केयर में भी मौजूदगी

कई बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स अपने लिक्विड फाउंडेशन और लिपस्टिक में इसे कंडीशनर और ह्यूमेक्टेंट (नमी बनाए रखने वाला तत्व) के तौर पर मिलाते हैं ताकि मेकअप त्वचा पर लंबे समय तक टिका रहे। वहीं, बालों के लिए शैम्पू, हेयर टॉनिक और कंडीशनर में इसके अर्क का इस्तेमाल स्कैल्प की सेहत सुधारने और हेयर ग्रोथ को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

गंदगी वाले नहीं, बल्कि ‘स्पेशल लैब्स’ में पाले जाते हैं ये कॉकरोच

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या नालियों में घूमने वाले कॉकरोच को प्रोडक्ट्स में डाला जाता है? तो जवाब है- बिल्कुल नहीं।

कॉस्मेटिक्स और दवाओं में इस्तेमाल होने वाले तिलचट्टों को बेहद साफ-सुथरे, स्टेराइल (कीटाणुरहित) और पूरी तरह से नियंत्रित वातावरण वाले आधुनिक फार्मों में पाला जाता है। इन्हें बैक्टीरिया, कीटनाशकों और बाहरी गंदगी से कोसों दूर रखा जाता है, ताकि इनके भीतर मिलने वाले केमिकल पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित हों।

सीधे पीसकर नहीं, वैज्ञानिक प्रक्रिया से बनते हैं प्रोडक्ट्स

फार्मों में तैयार कॉकरोच को सीधे पीसकर किसी क्रीम या सिरप में नहीं मिलाया जाता। इसके लिए बेहद जटिल वैज्ञानिक और केमिकल एक्सट्रैक्शन तकनीकों का सहारा लिया जाता है। इसके जरिए तिलचट्टे के शरीर से केवल जरूरी और शुद्ध तत्वों (जैसे चिटोसन) को अलग निकाला जाता है। चीन जैसे देशों में तो बकायदा FDA और अन्य बड़ी सुरक्षा एजेंसियों से सेफ्टी परमिशन और सर्टिफिकेशन मिलने के बाद ही इसे बाजार में उतारा जाता है।

दवाओं और बायोटेक्नोलॉजी का नया स्रोत

कॉकरोच के शरीर में प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया से लड़ने वाले अद्भुत एंटीबायोटिक गुण होते हैं। इसी वजह से ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन (TCM) में इसका उपयोग सदियों से हो रहा है। पेट की बीमारियों से जुड़े सिरप में भी इसका उपयोग बढ़ा है। इसके अलावा, वैज्ञानिक इस जीव के मजबूत शारीरिक ढांचे का अध्ययन कर आधुनिक ‘माइक्रो-रोबोट’ और बायो-इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स बना रहे हैं।

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