चाईबासा : नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत कोल्हान विश्वविद्यालय में जल्द ही एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। वर्ष 2026 से चार वर्षीय स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रम का पहला बैच शुरू होने के साथ ही पीजी शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
विश्वविद्यालय की ओर से सभी संबद्ध कॉलेजों से एक वर्षीय पीजी कोर्स को लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद अब नए पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में काम तेज कर दिया गया है। साथ ही पीजी के नए सिलेबस को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसे जल्द विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। अब तक तीन वर्षीय स्नातक कोर्स पूरा करने वाले विद्यार्थियों को दो वर्षीय पीजी करना पड़ता था, लेकिन चार वर्षीय यूजी प्रणाली लागू होने के बाद छात्रों को केवल एक वर्ष का पीजी कोर्स करना होगा। हालांकि, जिन विद्यार्थियों ने तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम किया है, उनके लिए फिलहाल दो वर्षीय पीजी व्यवस्था जारी रहेगी।
नई व्यवस्था के तहत पीजी स्तर पर वर्षों से चली आ रही पारंपरिक विषय-बाध्यता भी समाप्त कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पोस्ट ग्रेजुएट करिकुलम एंड क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुसार अब विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार विषय बदलने और नए विषयों का चयन करने की स्वतंत्रता मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से छात्रों को उच्च शिक्षा में अधिक लचीलापन मिलेगा और वे अपनी पसंद एवं करियर के अनुसार विषयों का चयन कर सकेंगे। आने वाले समय में देशभर में चार वर्षीय स्नातक और एक वर्षीय पीजी प्रणाली पूरी तरह लागू होने की संभावना जताई जा रही है।
कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार झा ने बताया कि चार वर्षीय यूजी कोर्स का यह पहला बैच है और इसके बाद एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम भी जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और उच्च शिक्षा अधिक व्यावहारिक एवं आधुनिक बनेगी।
