नई दिल्ली : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर सौरभ मुखर्जी ने भारत की व्हाइट कॉलर नौकरियों पर बड़ा खतरा बताया है। Marcellus Investment Managers के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने कहा कि कंपनियां तेजी से इंसानों द्वारा किए जाने वाले कामों को ऑटोमेट कर रही हैं।
उन्होंने ServiceNow की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2030 तक भारत में करीब 1.8 करोड़ नौकरियां एआई से प्रभावित हो सकती हैं, जबकि केवल 30 लाख नई टेक नौकरियां पैदा होंगी। हालांकि रिपोर्ट में नौकरियों के पूरी तरह खत्म होने नहीं, बल्कि “एआई द्वारा ट्रांसफॉर्म” होने की बात कही गई है।
सौरभ ने टेक सेक्टर में जारी छंटनी का जिक्र करते हुए कहा कि “अभी तो यह सिर्फ ट्रेलर है।” उनके अनुसार एआई अब कोडिंग जैसे कामों में 50 प्रतिशत तक भूमिका निभा रहा है और अगले 2-3 वर्षों में यह 90 से 100 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि Microsoft, Amazon, Alphabet, Apple और Anthropic जैसी कंपनियों ने बीते 12 महीनों में एआई पर अपना खर्च दोगुना कर दिया है।
वहीं EY के सर्वे के अनुसार भारत के 58 प्रतिशत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर एजेंटिक एआई और 80 प्रतिशत से अधिक जेनरेटिव एआई में निवेश कर रहे हैं।
