झारखंड में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बेहद तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चुनाव में विधायकों की खरीद-फरोख्त और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की गंभीर आशंका जताते हुए भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने निष्पक्ष चुनाव के लिए केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखने की मांग की है।
झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और विनोद पांडेय द्वारा चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में आंकड़ों का हवाला दिया गया है। पत्र के अनुसार:
- 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में जेएमएम, कांग्रेस, राजद और भाकपा (माले) गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इस आंकड़े के लिहाज से दोनों राज्यसभा सीटों पर महागठबंधन की जीत तय है।
- दूसरी ओर, भाजपा और उसके सहयोगियों के पास केवल 24 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए भी जरूरी आंकड़े से कम है।
इसके बावजूद भाजपा द्वारा प्रत्याशी उतारने की घोषणा पर झामुमो ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि विधायकों को आर्थिक प्रलोभन देने, बाहरी दबाव बनाने और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।
पलटवार: बीजेपी ने कहा- ‘गठबंधन को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं’
इधर, रांची में भाजपा चुनाव समिति की बैठक में राज्यसभा की एक सीट पर उम्मीदवार उतारने का आधिकारिक फैसला लिया गया। प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने कहा कि पार्टी का ही कोई समर्पित कार्यकर्ता इस बार चुनाव मैदान में उतरेगा।
भाजपा ने झामुमो के हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पलटवार करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि महागठबंधन को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं रह गया है, इसलिए वे इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, आदित्य साहू, नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, कर्मवीर सिंह, विद्युत वरण महतो और दीपक प्रकाश सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे।
