झारखंड की समृद्ध जैव विविधता, वन संपदा और वनवासियों के हुनर को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा आगामी सितंबर-अक्टूबर के दौरान राज्य में एक भव्य ‘राष्ट्रीय वन मेले’ का आयोजन किया जाएगा। इस मेले का मुख्य फोकस राज्य में ₹3000 करोड़ का कारोबार खड़ा करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसरों को बढ़ाना है।
देश-दुनिया के दिग्गज होंगे शामिल
प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने बताया कि इस राष्ट्रीय स्तर के मेले में देश और दुनिया भर के पर्यावरणविद, आदिवासी अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ, बड़े उद्यमी और स्टार्टअप्स हिस्सा लेंगे। इसके जरिए झारखंड के वनवासी क्षेत्रों से जुड़े युवाओं और उद्यमियों को अपने पारंपरिक व आधुनिक उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने का एक बड़ा मंच मिलेगा।
मेले में झारखंड के जंगलों से मिलने वाले बहुमूल्य लघु वन उत्पादों और ट्राइबल हैंडीक्राफ्ट को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- महुआ, साल के बीज और करंज
- शुद्ध शहद और आंवला
- बांस के उत्पाद और तुलसी
- वेलनेस, औषधीय उत्पाद और हर्बल सौंदर्य प्रसाधन
उपभोक्ताओं को एक ही छत के नीचे शुद्ध शहद से लेकर स्वास्थ्य और सौंदर्य से जुड़े बेहतरीन उत्पाद उपलब्ध होंगे।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में झारखंड में वनोत्पाद का कारोबार लगभग ₹1500 करोड़ का है। विभाग का लक्ष्य इस राष्ट्रीय वन मेले के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है, ताकि इस टर्नओवर को दोगुना कर ₹3000 करोड़ तक पहुंचाया जा सके। इससे सीधे तौर पर ग्रामीणों और वनवासियों की आमदनी में भारी इजाफा होगा।
मेले के दौरान सिर्फ उत्पादों की बिक्री ही नहीं होगी, बल्कि विशेषज्ञों द्वारा विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें:
- युवाओं और महिलाओं को उत्पाद निर्माण, बेहतर ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी।
- वन आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा।
वन विभाग के मुताबिक, इस पूरे आयोजन का अंतिम उद्देश्य ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना, हरित उद्योगों को बढ़ावा देना और झारखंड की ‘जल-जंगल-जमीन’ की ताकत को आर्थिक समृद्धि में बदलना है।
