डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन प्राइवेसी को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) संशोधन नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। 20 फरवरी 2026 से प्रभावी इन नए नियमों के तहत अब इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर की निजी फोटो, वीडियो या डीपफेक कंटेंट वायरल होने की शिकायत मिलने पर बेहद कम समय में कार्रवाई करनी होगी।
नियमों के अनुसार, अदालत या सरकार द्वारा अवैध घोषित कंटेंट को अब अधिकतम 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। वहीं, किसी व्यक्ति की बिना अनुमति साझा की गई निजी तस्वीर, न्यूडिटी, मॉर्फ्ड वीडियो या एआई से तैयार किए गए डीपफेक कंटेंट को शिकायत मिलने के 2 घंटे के भीतर हटाना होगा। पहले ऐसी कार्रवाई में 24 से 36 घंटे तक का समय लगता था।
सरकार ने “सिंथेटिक कंटेंट” की भी स्पष्ट परिभाषा तय की है। इसके तहत एआई या एल्गोरिद्म की मदद से तैयार या बदले गए ऐसे ऑडियो-वीडियो कंटेंट, जो किसी असली व्यक्ति या घटना जैसे दिखें, उन्हें सिंथेटिक कंटेंट माना जाएगा। ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि यूजर्स को पता चल सके कि सामग्री वास्तविक नहीं है। हालांकि मोबाइल कैमरे से होने वाले सामान्य ऑटो एन्हांसमेंट या मामूली एडिटिंग को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।

नए नियमों में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एआई के उपयोग की जानकारी यूजर्स को देना भी जरूरी कर दिया गया है। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर ब्लैकमेलिंग, फर्जी कंटेंट और डेटा दुरुपयोग पर सख्ती से रोक लगाना है।
सरकार के अनुसार, पहले आपत्तिजनक या निजी कंटेंट हटाने की प्रक्रिया काफी धीमी थी, जिससे पीड़ितों को मानसिक तनाव और सामाजिक नुकसान का सामना करना पड़ता था। अब सख्त समय सीमा लागू होने से डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ेगी और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को अधिक मजबूती मिलेगी।
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