झारखंड को बिजली संकट से उबारने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। रामगढ़ जिले के पतरातू स्थित पीवीयूएनएल प्लांट में 11 मई 2026 की शाम 7:15 बजे 800 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-2 का सफल ट्रायल ऑपरेशन पूरा कर लिया गया। इस सफलता के साथ ही अब यूनिट-2 से नियमित और कमर्शियल बिजली उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से राज्य में विशेषकर गर्मी के मौसम में होने वाली बिजली किल्लत से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
झारखंड को मिलेगा ‘शेयर’: 1360 मेगावाट पर राज्य का हक
पतरातू प्लांट की कार्यक्षमता अब दोगुनी होने जा रही है:
- पहले से ही 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रही है।
- ट्रायल सफल होने के बाद अब यहाँ से कुल 1600 मेगावाट बिजली पैदा होगी।
- कुल उत्पादन का 85 प्रतिशत यानी 1360 मेगावाट बिजली सीधे झारखंड को मिलेगी।
पूरी टीम में खुशी की लहर
इस ऐतिहासिक पल के साक्षी पीवीयूएनएल के सीईओ ए के सहगल, सीजीएम प्रोजेक्ट अनुपम मुखर्जी और जीएम ऑपरेशन मनीष खेतरपाल सहित एनटीपीसी और बीएचईएलके कई वरिष्ठ अधिकारी बने। ट्रायल सफल होते ही कंट्रोल रूम तालियों की गड़गड़ाहत से गूंज उठा।
लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
पीवीयूएनएल के सीईओ ए के सहगल ने टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह सफलता पूरी टीम के समर्पण का परिणाम है। 5 नवंबर 2025 को यूनिट-1 का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हुआ था और अब यूनिट-2 भी पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने इस सहयोग के लिए झारखंड सरकार, जेबीवीएनएल और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
क्यों खास है यह उपलब्धि?
- राज्य को मिलने वाली अतिरिक्त बिजली से शहरों और गांवों में बिजली कटौती कम होगी।
- निर्बाध बिजली आपूर्ति से राज्य के उद्योगों को गति मिलेगी।
- मई-जून की भीषण गर्मी के दौरान बढ़ी हुई डिमांड को पूरा करना अब आसान होगा।
अबसे हर अपडेट के लिये जुड़े रहे — ताजा खबरों के लिये हमारे न्यूज चैनल और वेबसाइट को लाइक और सब्सक्राइब करें —








