सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र में वन विभाग की ओर से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान वनरक्षी वशिष्ठ नारायण ने लेपाटांड हाई स्कूल पहुंचकर स्कूली बच्चों को जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और हाथियों की सुरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जागरूकता सत्र के दौरान वनरक्षी वशिष्ठ नारायण ने बच्चों को हाथी कॉरिडोर के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जंगलों के लगातार सिमटने, औद्योगिक विस्तार, सड़कों के चौड़ीकरण और अवैध बालू खनन के कारण हाथियों का प्राकृतिक आवागमन प्रभावित हो रहा है। यही वजह है कि हाथी जंगलों से निकलकर गांवों की ओर आ रहे हैं और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने विशेष रूप से ईचागढ़ क्षेत्र की करकरी नदी और सुवर्णरेखा नदी में हो रहे अवैध बालू खनन को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि नदी क्षेत्रों में अत्यधिक खनन से हाथियों के पारंपरिक जल स्रोत और रास्ते प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वन्यजीवों को परेशानी हो रही है।


कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने “जल-जंगल-जमीन हमारा है और हाथी भी हमारा है” का नारा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने जंगलों और वन्य जीवों की सुरक्षा का संकल्प भी लिया।
विद्यालय प्रबंधन ने वन विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। कार्यक्रम में बच्चों ने पोस्टर और निबंध के माध्यम से भी संरक्षण का संदेश दिया।









