सारंडा में सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ा, एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा लगातार बदल रहा ठिकाना

सारंडा में सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ा, एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा लगातार बदल रहा ठिकाना

Johar News Times
2 Min Read

ऑपरेशन मेघाबुरू के बाद कमजोर पड़ा माओवादी नेटवर्क, कई नक्सलियों के संगठन छोड़ने और सरेंडर की चर्चा तेज,

चाईबासा , पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों का नक्सल विरोधी अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर इस समय भाकपा माओवादी का शीर्ष कमांडर और एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर है। हाल के महीनों में सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में चलाए गए बड़े अभियानों के बाद माओवादी संगठन पर दबाव लगातार बढ़ा है।

- Advertisement -
Ad image

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों की लगातार घेराबंदी और जंगल में बढ़ी निगरानी के कारण मिसिर बेसरा को बार-बार अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि माओवादी संगठन की सप्लाई चेन भी काफी कमजोर हुई है, जिससे हथियार, राशन और दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

जनवरी 2026 में सारंडा में चलाए गए “ऑपरेशन मेघाबुरू” के दौरान कई बड़े माओवादी मारे गए थे। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया था कि सारंडा में सक्रिय नक्सलियों का नेटवर्क तेजी से कमजोर हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री ने भी इस अभियान को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता बताया था।

सूत्रों की मानें तो संगठन के भीतर भी टूट की स्थिति बनी हुई है और कई नक्सली सक्रिय दस्ते छोड़ चुके हैं। हालांकि 20 से अधिक नक्सलियों के अलग होने या मिसिर बेसरा के सरेंडर को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं और जंगल के अंदर ड्रोन व हाईटेक निगरानी बढ़ाई गई है।

इधर क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि लगातार बढ़ते दबाव और कमजोर पड़ते नेटवर्क के कारण आने वाले समय में कुछ माओवादी आत्मसमर्पण का रास्ता चुन सकते हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

- Advertisement -
Ad image
Share This Article