
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है और राज्य में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
पार्टी ने अपने X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर कहा कि वह किसी ऐसे विवाद से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिससे किसी समुदाय की भावनाओं या पहचान पर सवाल उठता हो। इस फैसले को कथित ‘गोपनीय वीडियो’ विवाद से भी जोड़ा जा रहा है।
AIMIM ने यह भी कहा कि हालिया घटनाक्रमों ने यह दिखाया है कि बंगाल के मुसलमानों की स्थिति और असुरक्षा पर गंभीर सवाल उठते हैं, इसलिए पार्टी ऐसे किसी भी बयान या विवाद से दूरी बनाए रखेगी।
हुमायूं कबीर ने कहा कि ओवैसी अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं और वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों दलों ने 25 मार्च को कोलकाता में संयुक्त प्रेस वार्ता में साथ चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।
कबीर ने बताया कि उनकी पार्टी राज्य की 182 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है और उनका प्रचार अभियान जारी है। उन्होंने ‘गोपनीय वीडियो’ को एआई-जनित बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
हुमायूं कबीर को पहले तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किया गया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई। उनका राजनीतिक सफर कई विवादों और धार्मिक-सामाजिक मुद्दों से जुड़ा रहा है।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी भी आज पश्चिम बंगाल के लिए अपना संकल्प पत्र जारी करने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता में इसकी घोषणा करेंगे।
अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पश्चिम बंगाल को “TMC के भय राज” से मुक्ति दिलाना भाजपा के संकल्प पत्र का मुख्य उद्देश्य है। वे इस दौरान मेदिनीपुर में जनसभा और खड़गपुर में रोड शो भी करेंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत राज्य में मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में भी इसी समय चुनाव प्रक्रिया जारी है।
AIMIM और AJUP का गठबंधन टूटने से बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है। वहीं भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला पहले से और अधिक तीखा होता दिख रहा है।











