MOU खत्म होने से योजना के तहत बंद हुआ इलाज, डॉ. परितोष सिंह ने CM और स्वास्थ्य मंत्री से की अपील
जमशेदपुर:
पूर्वी सिंहभूम जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां 11 वर्षीय आदिवासी बच्ची लक्ष्मी मुंडा का इलाज तकनीकी कारणों से रुक गया है। बच्ची ‘एक्यूट ब्लड कैंसर’ जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है, लेकिन प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी खामियों के कारण उसका इलाज अधर में लटक गया है।
जिला परिषद सदस्य सह कांग्रेस नेता डॉ. परितोष सिंह ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और समय रहते इलाज नहीं मिलने पर बच्ची की जान को खतरा हो सकता है।
MOU समाप्त होने से रुका इलाज:
डॉ. सिंह के अनुसार, लक्ष्मी मुंडा का इलाज ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना’ के तहत टाटा कैंसर अस्पताल में संभव था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल के बीच हुआ एमओयू (MOU) 17 मार्च को समाप्त हो गया, जिसके बाद इस योजना के तहत इलाज की सुविधा बंद कर दी गई।
बताया गया कि यह एमओयू पिछले कुछ वर्षों से हर साल विस्तार (एक्सटेंशन) के आधार पर चलता आ रहा था, लेकिन इस बार समय पर नवीनीकरण नहीं होने से कई जरूरतमंद मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग:
डॉ. परितोष सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी को सोशल मीडिया (ट्वीट) के माध्यम से मामले की जानकारी देते हुए तत्काल संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
उन्होंने मांग की है कि:
- टाटा कैंसर अस्पताल समेत जमशेदपुर के सभी संबंधित अस्पतालों के साथ स्वास्थ्य विभाग का MOU युद्ध स्तर पर नवीनीकृत किया जाए।
- 2022 से लंबित नवीनीकरण प्रक्रिया को जल्द पूरा कर गरीब मरीजों को राहत दी जाए।
- जिला प्रशासन और सिविल सर्जन इस मामले में व्यक्तिगत पहल कर बच्ची को तुरंत इलाज और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं।
गरीब मरीजों पर संकट:
डॉ. सिंह ने कहा कि एमओयू समाप्त होने से सिर्फ लक्ष्मी मुंडा ही नहीं, बल्कि कई अन्य गरीब मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा है। ऐसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जीवन रक्षक साबित होती हैं, इसलिए इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
हर संभव मदद का आश्वासन:
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी और वे स्वयं इस बच्ची के इलाज और जीवन रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। साथ ही सरकार से अपील की कि मानवीय आधार पर त्वरित निर्णय लेकर बच्ची को इलाज उपलब्ध कराया जाए।
यह मामला एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था में समन्वय की कमी और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानियों को उजागर करता है।











