संतोष सिन्हा
बालूमाथ, राजहरा एरिया अंतर्गत बालूमाथ मे संचालित तेतरियांखांड़ कोलियरी मे कोयला उठाव को लेकर लगातार चलते आ रहे गतिरोध आज सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद लगभग समाप्त हो गया है। सूत्रों के अनुसार झारखंड हाईकोर्ट ने पीएनएम कंपनी संचालक की ओर से दायर याचिका सीसीएल की तेतरियाखांड़ कोलियरी मे उत्पादन कर स्टॉक मे रखे गए करीब 13 लाख टन कोयला को हाईवा ट्रक से उठाव नही होने के कारण आग लगने से लगातार जल रहे कोयला पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अविलंब तेतरियांखांड़ कोलियरी से कोयला उठाव करने का आदेश दिया गया है। जिससे संबंधित विभागों और प्रशासन को सूचनार्थ प्रेषित कर दिया गया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने तेतरियाखाड़ ओसीपी मामले में याचिका का किया निष्पादन किया गया है। जानकारी के अनुसार
झारखंड हाईकोर्ट में तेतरियाखाड़ ओसीपी से जुड़े मामले में दायर रिट याचिका (डब्लुपीसी 386/2026) का निष्पादन कर दिया गया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। अदालत ने 11 मई 2026 को मामले का निपटारा करते हुए इसे “Case Disposed Off” घोषित किया। यह याचिका बिरेंदर कुमार उरांव की ओर से दायर की गई थी। याचिका में राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लातेहार जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, सीसीएल मुख्यालय तथा तेतरियाखाड़ ओसीपी प्रबंधन सहित कुल 11 पक्षकारों को प्रतिवादी बनाया गया था।मामले में मुख्य रूप से तेतरियाखाड़ ओसीपी क्षेत्र में प्रदूषण, कोयला उठाव और स्थानीय समस्याओं को लेकर पक्ष रखा गया था। अदालत में राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार एवं अन्य ने पैरवी की।हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार यह मामला जनवरी 2026 में दाखिल किया गया था तथा फरवरी 2026 में पंजीकृत हुआ था। अब न्यायालय द्वारा मामले का निष्पादन कर दिए जाने के बाद संबंधित पक्षों की निगाहें आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
वहीं तेतरियाखांड़ पीओ जय प्रकाश रावत ने कोलियरी के विभिन्न समस्याओं से अवगत कराते हुए बताया है कि तेतरियांखांड़ कोलियरी में लगभग 13 लाख टन कोयला उत्पादन कर स्टॉक जमा हो गया है। उनका कहना है कि डीओ होल्डरों द्वारा अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला पहले ही उठा लिया गया। जबकि बचा हुआ 13 लाख टन कोयला लंबे समय से पड़ा हुआ धु धु कर जल रहा है।इस दौरान कई स्थानों पर कोयले में भी भीषण आग लग गई है,जिससे लगातार जहरीली गैस और धुआं निकल रहा है। पीओ जेपी रावत ने यह भी बताया अगर समय रहते उक्त 13 लाख टन कोयला हाईवा और ट्रकों से उठा नही किया जाता है तो सीसीएल को 1 3 करोड़ रुपए राजस्व का घाटा होगी। जिसका जिम्मेवार कौन होगा ?
कोयला उठाव को लेकर हाईकोर्ट ने पीएनएम की ओर से दायर याचिका पर दिया फैसला
कोयला उठाव को लेकर हाईकोर्ट ने पीएनएम की ओर से दायर याचिका पर दिया फैसला








