रांची: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठ रहे सवालों और भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने प्रश्नोत्तर पुस्तिका का पहला भाग जारी किया है। इसमें आम मतदाताओं, बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा पूछे जा रहे 30 प्रमुख सवालों के जवाब शामिल किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विभिन्न माध्यमों से लगातार जिज्ञासाएं और शंकाएं सामने आ रही थीं। इन्हें ध्यान में रखते हुए यह पुस्तिका तैयार की गई है, ताकि मतदाताओं और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों को स्पष्ट और सही जानकारी मिल सके।
पुस्तिका में बीएलओ, बूथ स्तरीय अभिकर्ताओं, मतदाता सूची में शामिल और नए मतदाताओं की भूमिका एवं जिम्मेदारियों के साथ-साथ पुनरीक्षण की आवश्यकता, दस्तावेजों की अनिवार्यता, गणना प्रपत्र भरने की प्रक्रिया, प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन, दावा-आपत्ति और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से संबंधित जानकारी दी गई है।
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि झारखंड में अंतिम विशेष गहन पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था। इसी कारण वर्तमान मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2003 की सूची से किया जा रहा है। जिन मतदाताओं की मैपिंग सफलतापूर्वक हो जाएगी और रिकॉर्ड में कोई विसंगति नहीं होगी, उन्हें गणना प्रपत्र के अलावा अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पुस्तिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल ‘अनमैप्ड’ होने के आधार पर किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। ऐसे मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत गणना प्रपत्र जमा कर प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रख सकेंगे। आवश्यकता पड़ने पर बाद में सहायक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि गलत घोषणा देना कानूनन दंडनीय अपराध है। निर्वाचन विभाग की ओर से जारी यह प्रश्नोत्तर पुस्तिका मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को 2003 की सूची में नाम खोजने के लिए वेबसाइट, ECINET ऐप और संबंधित निर्वाचन कार्यालयों में उपलब्ध हार्ड कॉपी की सुविधा का भी उल्लेख किया है।
