भारतीय स्टील सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा स्टीलने पिछले आठ वर्षों में अपनी उत्पादन क्षमता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की है। देश में बुनियादी ढांचे के तेजी से होते विकास और स्टील की बढ़ती मांग के चलते कंपनी की उत्पादन क्षमता अब दोगुनी से भी अधिक हो गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता जहां 13 मिलियन टन थी, वहीं 31 मार्च 2026 तक यह शानदार बढ़त के साथ 27.4 मिलियन टन के स्तर पर पहुंच चुकी है।
टाटा स्टील का यह विस्तार घरेलू बाजार में स्टील की बढ़ती खपत के सीधे आनुपातिक है। वर्ष 2018 में भारत में स्टील की कुल खपत 91 मिलियन टन दर्ज की गई थी, जो अब वर्तमान समय में बढ़कर लगभग 164 मिलियन टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, रियल एस्टेट में तेजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग ने इस खपत को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है।
बाजार की इस चौतरफा मांग को भांपते हुए स्टील सेक्टर की तमाम कंपनियां अपने प्लांट के विस्तार और नई तकनीकों पर भारी निवेश कर रही हैं। इसी रणनीतिक कदम के तहत टाटा स्टील ने भी पिछले आठ वर्षों में अपने उत्पादन ढांचे को मजबूत करने के लिए आक्रामक रूप से निवेश किया। क्षमता दोगुनी होने से न सिर्फ कंपनी का उत्पादन बढ़ा है, बल्कि भारतीय स्टील बाजार में इसकी हिस्सेदारी भी पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक और घरेलू मांग को पूरा करने में टाटा स्टील का यह बढ़ा हुआ उत्पादन ढांचा बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।
