जिले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शुक्रवार को कथित तौर पर दूषित भोजन और भीषण गर्मी में टंकी का गर्म पानी पीने से 100 से अधिक छात्राएं बीमार पड़ गईं। करीब 300 छात्राओं वाले छात्रावास में घटना के समय न तो वार्डन मौजूद थीं और न ही एकाउंटेंट, जिससे विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठे हैं।
छात्राओं ने बताया कि दोपहर में उन्हें पुआ और चावल दिया गया था। बिजली नहीं रहने से टंकी का पानी अत्यधिक गर्म हो गया था, जिसे पीने के लिए वे मजबूर हुईं। शाम को मुरमुरा खाने के बाद भी पीने का पानी नहीं मिला। इसके बाद कई छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने लगे। छात्राओं का आरोप है कि जनरेटर होने के बावजूद पानी की मोटर नहीं चलाई गई। बताया जा रहा है कि हॉस्टल की लगभग 75 प्रतिशत छात्राएं बीमार महसूस कर रही थीं। शाम से छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बावजूद मामला दबाने का आरोप लगा है। सूचना मिलने पर पहुंचे अभिभावकों को काफी देर तक हॉस्टल के अंदर नहीं जाने दिया गया। हंगामे के बाद स्थानीय थाना प्रभारी के हस्तक्षेप से मुख्य गेट खोला गया।
रात करीब 9 बजे छात्राओं को भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में 20 से अधिक छात्राओं की हालत गंभीर बताई गई। नैना और काजल की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जबकि देवरानी कुमारी, रूपा कुमारी, विनीता कुमारी, रौशनी कुमारी और चंदा कुमारी समेत अन्य छात्राओं का भी इलाज चल रहा है। सूचना मिलते ही बीडीओ नंद जी राम और अंचलाधिकारी शंभू राम अस्पताल पहुंचे। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला फूड प्वाइजनिंग और गर्म या दूषित पानी पीने का प्रतीत होता है। सभी छात्राओं का इलाज जारी है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
घटना के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने वार्डन और एकाउंटेंट की अनुपस्थिति, समय पर इलाज नहीं कराने और अभिभावकों को छात्राओं से मिलने से रोकने के मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
