Seraikela News: सरायकेला में बड़ी लापरवाही! पोल के बजाय पेड़ों के सहारे दौड़ा दी 1.5 KM बिजली की लाइन, बच्चों पर मंडराया मौत का खतरा

"प्रशासनिक लापरवाही का करंट: सरायकेला में खंभे गायब, पेड़ों पर लटके मौत के तार; ठेकेदार और बिजली विभाग की साठगांठ का ग्रामीणों ने किया पर्दाफाश।"

Johar News Times
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सरायकेला-खरसावां: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड से विकास और विभागीय लापरवाही की एक ऐसी हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। यहाँ ग्राम शीशी से लेकर निर्माणाधीन अल्पसंख्यक विद्यालय तक लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी बिजली की हाईटेंशन लाइन को बिना किसी पोल के, सिर्फ सड़क किनारे खड़े पेड़ों के सहारे टांग दिया गया है। ग्रामीणों ने इस पूरे खेल की पोल खोलते हुए बिजली विभाग और संवेदक पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है।

CEA सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियां, बच्चों की जान आफत में

ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत अधिनियम, 2003 और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सुरक्षा विनियमों के तहत किसी भी बिजली लाइन का निर्माण मजबूत पोल के माध्यम से होना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।

तार कई जगहों पर इतने नीचे लटके हुए हैं कि खेलते-कूदते बच्चे भी आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं। कई पेड़-पौधों में करंट उतरने की भी शिकायतें मिल रही हैं, जिससे स्थानीय किसानों और मवेशियों पर हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता है।

सीधे ‘बिजली चोरी’ का भी लगा गंभीर आरोप

मामले में केवल लापरवाही ही नहीं, बल्कि एक बड़ा घोटाला भी सामने आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मीटर तक बिजली पहुंचने से पहले ही, मुख्य लाइन से सीधे अवैध कनेक्शन जोड़कर निर्माण कार्य के लिए बिजली का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में कहा, “मीटर लगा ही नहीं और लाइट जला रहे हैं। सीधे तार जोड़ दिया है। कई बार बोलने के बाद भी ठेकेदार और बिजली विभाग के कान पर जूं नहीं रेंग रही। बिना विभागीय मिलीभगत के इतनी बड़ी बिजली चोरी मुमकिन ही नहीं है।”

सड़क भी हुई बदहाल, खेतों के ऊपर से गुजरे मौत के तार

अल्पसंख्यक विद्यालय निर्माण में लगे भारी वाहनों और ट्रैक्टरों के कारण गांव की एकमात्र कच्ची सड़क पूरी तरह से टूटकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। अब ग्रामीणों का वहां पैदल चलना भी दूभर हो गया है। इसके अलावा, ये खतरनाक तार ग्रामीणों के निजी खेतों के ऊपर से भी गुजारे गए हैं, जिससे खेतों में काम करने वाले किसान डरे हुए हैं।

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

बार-बार स्थानीय स्तर पर शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक न तो ठेकेदार ने और न ही बिजली विभाग के किसी अधिकारी ने सुध ली है। इस मामले पर फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अब पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा मानकों के तहत तुरंत नए पोल लगाकर बिजली लाइन को दुरुस्त करने की मांग की है।

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