अंशदान जमा करने के बावजूद आदिवासी परिवार योजना से वंचित, उठे कई सवाल,
गुड़ाबांदा: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा प्रखंड की फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के मुड़ाठाकरा गांव निवासी आदिवासी लाभुक राजेंद्र नाथ मुर्मू को अंशदान राशि जमा करने के तीन वर्ष बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। वर्ष 2022-23 में राजेंद्र नाथ मुर्मू का चयन 75 प्रतिशत अनुदान वाली बकरा विकास योजना के लिए किया गया था। जिला पशुपालन विभाग ने उन्हें सूचित किया था कि सरकारी अनुदान राशि एस्क्रो खाते में जमा कर दी गई है और उन्हें अपने हिस्से की 6,071 रुपये अंशदान राशि जमा करनी होगी। विभागीय पत्र में स्पष्ट किया गया था कि अंशदान जमा होने के बाद पशुधन उपलब्ध कराया जाएगा।
आर्थिक तंगी के बावजूद राजेंद्र नाथ मुर्मू ने 2 जून 2023 को दो किश्तों में निर्धारित राशि जमा कर दी। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार यह राशि सफलतापूर्वक सरकारी खाते में पहुंच गई। इसके बावजूद वर्ष 2026 तक उन्हें न तो बकरे उपलब्ध कराए गए और न ही विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब मिला। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की उम्मीद में गरीब परिवार अपनी गाढ़ी कमाई खर्च कर देते हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण उन्हें वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। इससे सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अंशदान जमा होने के बाद भी लाभ क्यों नहीं दिया गया? जमा राशि की वर्तमान स्थिति क्या है? और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी? इन सवालों का जवाब अब तक नहीं मिल पाया है।
