चतरा लोकसभा क्षेत्र के बालूमाथ में पैसेंजर ट्रेन सेवा शुरू न होने को लेकर स्थानीय जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी कालीचरण सिंह द्वारा किए गए वादे को लेकर अब क्षेत्र के ग्रामीणों ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने सांसद को उनका वादा याद दिलाते हुए तीखा सवाल पूछा है कि— “100 दिन छोड़िए, 365 दिन से अधिक बीत गए, लेकिन बालूमाथ के लोगों को पैसेंजर ट्रेन की सौगात कब मिलेगी?”
दरअसल, लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सांसद कालीचरण सिंह ने जनता से वादा किया था कि वे चुनाव जीतने के 100 दिनों के भीतर खुद पैसेंजर ट्रेन में बैठकर बालूमाथ आएंगे। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। ट्रेन सेवा शुरू नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के वक्त बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं दिखा। अब लोग सांसद की इस वादाखिलाफी के खिलाफ उग्र आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं।
इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के युवा प्रखंड अध्यक्ष प्रदीप गंझू ने भाजपा सांसद पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “भाजपा चुनाव के समय कुछ और बोलती है और चुनाव के बाद कुछ और करती है। जनता अब इनकी चाल समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगी।” वहीं झामुमो के केंद्रीय सदस्य जुनैद अनवर ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि जल्द ट्रेन सेवा शुरू नहीं हुई, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा।
बढ़ते जनआक्रोश के बीच भाजपा मंडल अध्यक्ष अखिलेश गंझू ने दबे जुबान में स्वीकार किया कि इस मामले को लेकर सांसद से बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि सांसद ने भरोसा दिलाया है कि वे इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं और जल्द से जल्द बालूमाथ को पैसेंजर ट्रेन की सौगात मिलेगी।
बालूमाथ अनुमंडल निर्माण संघर्ष समिति के सचिव संतोष कुमार सिन्हा, स्थानीय व्यवसायी विनोद बिहारी गुप्ता सहित क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि टोरी-लोहरदगा-रांची मेमु पैसेंजर ट्रेन का विस्तार बालूमाथ तक करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
स्थानीय विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन और सांसद को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि एक महीने के भीतर बालूमाथ के लिए पैसेंजर ट्रेन का परिचालन शुरू नहीं किया गया, तो पूरे क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और स्थानीय सांसद की होगी।
