विदेश में डॉक्टरी का सपना: बिना NEET के अमेरिका में ऐसे मिलेगा MBBS (MD) में एडमिशन, ये हैं टॉप 5 मेडिकल कॉलेज

भारत में हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर 'नीट' (NEET) प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं।

Johar News Times
5 Min Read

भारत में हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर ‘नीट’ (NEET) प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं। लेकिन सरकारी कॉलेजों में सीमित सीटों और कट-थ्रोट कॉम्पिटिशन (कड़ी प्रतिस्पर्धा) के कारण कई होनहार छात्रों का यह सपना अधूरा रह जाता है। ऐसे में विदेशों से मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) करना भारतीय छात्रों के बीच एक बेहतरीन और लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है।

अगर आप दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित देश अमेरिका (USA) से मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि वहां आपको भारत की NEET परीक्षा के स्कोर की जरूरत नहीं होती है।

अमेरिका में डायरेक्ट नहीं मिलता एडमिशन, यह है पूरी प्रक्रिया

अमेरिका में मेडिकल की पढ़ाई का स्ट्रक्चर भारत से काफी अलग है। वहां 12वीं कक्षा के तुरंत बाद सीधे मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिलता। इसके लिए छात्रों को एक खास प्रोसेस से गुजरना पड़ता है:

  • प्री-मेड कोर्स (Pre-Med): छात्रों को सबसे पहले 4 साल की बैचलर्स डिग्री (Pre-Med) पूरी करनी पड़ती है, जिसमें बायोलॉजी और केमिस्ट्री विषयों की पढ़ाई अनिवार्य है।
  • MCAT परीक्षा: बैचलर्स डिग्री के बाद, छात्रों को ‘मेडिकल कॉलेज एडमिशन टेस्ट’ (MCAT) नामक एक कठिन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास करनी होती है।
  • MD कोर्स: इस परीक्षा को क्वालिफाई करने के बाद ही उम्मीदवारों को अमेरिका के टॉप मेडिकल कॉलेजों में एमडी (MD) कोर्स में एडमिशन मिलता है, जो भारत के MBBS के बराबर डिग्री है।

भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका के टॉप 5 मेडिकल कॉलेज

यदि आप अमेरिका से मेडिकल की पढ़ाई करने का मन बना रहे हैं, तो ये वहां के सबसे सर्वश्रेष्ठ और प्रतिष्ठित संस्थान हैं:

1. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (Harvard Medical School)

  • खासियत: यह अमेरिका का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसकी स्थापना 1782 में हुई थी। यहां से पढ़े 160 से अधिक दिग्गजों ने नोबेल पुरस्कार जीता है।
  • एक्सेप्टेंस रेट: बेहद कड़ा एडमिशन क्राइटीरिया होने के कारण यहां का एक्सेप्टेंस रेट सिर्फ 3% है।
  • सीटें और फीस: हर साल केवल 200 से 250 छात्रों को ही एमडी कोर्स में दाखिला मिलता है। यहां की सालाना फीस लगभग 77.50 लाख रुपये है।

2. येल यूनिवर्सिटी (Yale University)

  • खासियत: येल स्कूल ऑफ मेडिसिन अपने छोटे क्लास साइज के लिए जाना जाता है, जिससे हर छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जाता है। इसके पूर्व छात्रों में अमेरिका के ‘नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसिन’ के दर्जनों दिग्गज शामिल हैं।
  • एक्सेप्टेंस रेट: यहाँ का एक्सेप्टेंस रेट 5.5% है।
  • सीटें और फीस: एमडी (MD) प्रोग्राम में हर साल सिर्फ 100 चुनिंदा छात्रों को एंट्री मिलती है। यहां की सालाना फीस करीब 76 लाख रुपये (79,346 डॉलर) है।

3. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (Johns Hopkins University)

  • खासियत: यह अमेरिका की पहली आधिकारिक रिसर्च यूनिवर्सिटी है। यह संस्थान किसी भी अन्य मेडिकल कॉलेज के मुकाबले रिसर्च और इनोवेशन पर दोगुना पैसा खर्च करता है।
  • एक्सेप्टेंस रेट: यहाँ का एक्सेप्टेंस रेट 6.3% है।
  • सीटें और फीस: इस मेडिकल कॉलेज में हर साल केवल 250 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। यहां डॉक्टर बनने की सालाना फीस करीब 69.50 लाख रुपये है।

4. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University)

  • खासियत: कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में स्थित इस यूनिवर्सिटी के ‘स्कूल ऑफ मेडिसिन’ की मुख्य पहचान मजबूत रिसर्च और बेहतरीन क्लिनिकल एक्सपोजर है। इसके अस्पतालों में हर साल 10 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया जाता है।
  • सीटें और फीस: छोटी क्लास साइज के कारण छात्रों को प्रैक्टिकल सीखने का बेहतर मौका मिलता है। यहाँ की सालाना फीस लगभग 66 लाख रुपये है।

5. यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (University of Pennsylvania)

  • खासियत: इस यूनिवर्सिटी का ‘पेरलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन’ अमेरिका का सबसे पहला और पुराना मेडिकल कॉलेज है, जिसे साल 1765 में शुरू किया गया था। वर्तमान में यह कॉलेज बायोमेडिकल रिसर्च और एडवांस्ड पेशेंट केयर पर केंद्रित है।
  • सीटें और फीस: अन्य टॉप कॉलेजों की तुलना में यहां सीटें अधिक हैं। हर साल करीब 800 छात्रों को एमडी करने का अवसर मिलता है। यहां की सालाना फीस लगभग 79 लाख रुपये है।

Share This Article