झारखंड पुलिस में बड़ा फेरबदल: DGP तदाशा मिश्रा ने खुद संभाली पुलिस शिकायत समिति की कमान, एक महीने पुराना फैसला बदला

झारखंड पुलिस में बड़ा बदलाव: अब DGP खुद सुनेंगी पुलिसकर्मियों का दर्द।

Johar News Times
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झारखंड पुलिस मुख्यालय से इस वक्त की एक बड़ी और प्रशासनिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। पुलिसकर्मियों के तबादले और सेवा संबंधी शिकायतों के निपटारे के लिए गठित ‘शिकायत कोषांग समिति’ के नेतृत्व में अचानक एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस हाई-प्रोफाइल समिति की कमान खुद राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा संभालेंगी।

डीजीपी ने करीब एक महीने पुराने (8 मई को जारी) आदेश में संशोधन करते हुए नया आदेश जारी किया है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप और उत्सुकता दोनों बढ़ गई है।

मनोज कौशिक की जगह अब DGP करेंगी अध्यक्षता; जानें नई टीम में कौन-कौन?

गौरतलब है कि बीते 8 मई को जारी आदेश के तहत एडीजी मनोज कौशिक को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन नए संशोधित आदेश के बाद अब पूरी व्यवस्था बदल गई है।

नई पुनर्गठित समिति का स्वरूप:

  • अध्यक्ष: तदाशा मिश्रा (डीजीपी, झारखंड)
  • सदस्य: मनोज कौशिक (एडीजी, मुख्यालय)
  • सदस्य: असीम विक्रांत मिंज (आईजी, सीआईडी – संगठित अपराध)
  • सदस्य: पंकज कंबोज (आईजी, मानवाधिकार)

तबादला और सेवा संबंधी मामलों पर सीधे DGP की नजर

“पुलिस मुख्यालय को हर साल बड़ी संख्या में व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से जुड़े तबादले के आवेदन मिलते हैं। नई व्यवस्था के बाद अब हर आवेदन और शिकायत की सीधे डीजीपी स्तर पर निगरानी होगी।”

यह समिति मुख्य रूप से राज्यभर के पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों से मिलने वाले स्थानांतरण एवं अन्य सेवा संबंधी अनुरोधों पर विचार करेगी।

  • कई पुलिसकर्मी पारिवारिक परिस्थितियों, गंभीर बीमारी या अन्य विशेष कारणों से मनचाही पोस्टिंग या गृह जिले में तबादले की मांग करते हैं।
  • डीजीपी तदाशा मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि समिति ऐसे सभी आवेदनों का पूरी तरह निष्पक्ष मूल्यांकन करेगी और प्रत्येक मामले के गुण-दोष के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

क्यों अहम माना जा रहा है यह फैसला?

पुलिस महकमे के जानकारों का मानना है कि डीजीपी द्वारा खुद इस समिति की कमान हाथ में लेने से निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की शिकायतों का निपटारा अब अधिक तेजी और पारदर्शिता से हो सकेगा। सीधे शीर्ष स्तर से मॉनिटरिंग होने के कारण पैरवी संस्कृति पर लगाम लगेगी और वास्तविक रूप से परेशान पुलिसकर्मियों को त्वरित राहत मिल सकेगी।

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