झारखंड सरकार और पुलिस मुख्यालय ने आतंकवाद निरोधी दस्ता की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया है। राज्य की खुफिया और सुरक्षा एजेंसी एटीएस अब पूरी तरह से अपराध अनुसंधान विभाग के अधीन रहकर काम करेगी। इस संबंध में सूबे की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। नए बदलाव के लागू होते ही एटीएस से जुड़े पूर्व के सभी पुराने आदेश और दिशा-निर्देशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
क्यों किया गया यह बदलाव?
डीजीपी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य में आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए वर्ष 2015 में एटीएस का गठन किया गया था। इसके बाद, वर्ष 2021 में इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए इसे संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब अनुसंधान और प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से इसे सीआईडी के अंतर्गत लाया गया है।
जांच और प्रशासनिक काम CID के तहत, IG ऑपरेशन्स संभालेंगे फील्ड कमान
नए नियमों के तहत एटीएस की कार्यप्रणाली को दो हिस्सों में विभाजित किया गया है:
- एटीएस के सभी मुकदमों की जांच, केस डायरी, सुपरविजन, प्रोग्रेस रिपोर्ट और सभी प्रशासनिक कार्य सीआईडी की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चलेंगे। इन सभी कार्यों की सीधी मॉनिटरिंग सीआईडी प्रमुख करेंगे।
- आतंकवाद विरोधी अभियानों, स्लीपर सेल के खिलाफ कार्रवाई और आतंकियों की धर-पकड़ जैसे फील्ड ऑपरेशन्स के मामलों में एटीएस की व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी। ऑपरेशन्स के दौरान एटीएस के पुलिस अधीक्षक सीधे आईजी अभियान के निर्देशों के तहत काम करेंगे।
हर हाल में गोपनीयता बनाए रखने का निर्देश
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि एटीएस राज्य और देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील इकाई है। इसलिए, किसी भी केस की जांच, रणनीतिक ऑपरेशन्स और अन्य इनपुट से जुड़ी गतिविधियों में उच्च स्तर की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। पुलिस महकमे का मानना है कि इस कदम से राज्य में संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को और अधिक मजबूती मिलेगी।
