झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इंडिया गठबंधन (JMM-कांग्रेस) ने सीट बंटवारे और प्रत्याशी चयन पर रणनीति लगभग तय कर ली है। दोनों दलों के बीच एक-एक सीट पर सहमति बनाने की कवायद तेज है। सीएम हाउस में हुई अहम बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। बैठक में प्रदेश सह प्रभारी सिरी बेला प्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी मौजूद रहे। करीब दो घंटे चली इस बैठक में सीट शेयरिंग और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद संकेत मिले कि अगले दो दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पार्टी और सहयोगी दलों से चर्चा करेंगे, जिसके बाद शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
‘सीएम हाउस की पसंद का हो उम्मीदवार’ पर जोर
बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने अपनी एक सीट पर दावेदारी मजबूत की। वहीं कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि उम्मीदवार ऐसा हो जो “सीएम हाउस की पसंद का हो”, ताकि चुनाव में जीत की संभावनाएं मजबूत हों। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी आलाकमान की प्राथमिकता है कि झारखंड की दोनों सीटें इंडिया गठबंधन के खाते में जाएं। कांग्रेस एक सीट पर चुनाव लड़ने को तैयार है और स्थानीय उम्मीदवार को ही मैदान में उतारने पर जोर दिया जा रहा है।
कौन हो सकता है उम्मीदवार? चर्चाएं तेज
सूत्रों के अनुसार, JMM का प्रत्याशी अनुसूचित जनजाति वर्ग से हो सकता है, जबकि कांग्रेस ओबीसी या सामान्य वर्ग के उम्मीदवार पर विचार कर रही है। तेलंगाना के डिप्टी सीएम ने कुर्मी नेता को टिकट देने की पैरवी की है। संभावित नामों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और सुबोधकांत सहाय के नाम चर्चा में हैं। अल्पसंख्यक वर्ग से भी कुछ पूर्व सांसदों के नाम रेस में बताए जा रहे हैं। वहीं पूर्व सांसद धीरज साहू और प्रदीप बलमुचू ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है।
गठबंधन का दावा मजबूत
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि स्थानीय भावनाओं को देखते हुए प्रत्याशी तय किया जाएगा और गठबंधन मिलकर भाजपा को हराने में सफल रहेगा। अब सभी की नजर अगले दो दिनों में होने वाले अंतिम फैसले पर टिकी है, जब दोनों दल मिलकर नामों पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
