प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या आधी करने का फैसला लिया। वहीं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची सांसद संजय सेठ ने भी ईंधन बचत को लेकर अपने स्तर पर कई कदम उठाने की घोषणा की है।
राज्यपाल संतोष गंगवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के जवाब में ईंधन संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से उन्होंने लोक भवन में अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाकर सिर्फ चार करने का निर्णय लिया है।
पहले 8 गाड़ियां रहती थीं शामिल
लोक भवन सूत्रों के अनुसार, Z+ सुरक्षा श्रेणी में होने के कारण राज्यपाल के काफिले में सामान्यतः कम से कम आठ वाहन शामिल रहते थे। इसके अलावा प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त गाड़ियां भी उनकी आवाजाही के दौरान तैनात रहती थीं। अब नए निर्णय के तहत राज्यपाल के आधिकारिक काफिले में केवल चार वाहन ही शामिल होंगे। राज्यपाल ने अन्य जनप्रतिनिधियों और सरकारी पदाधिकारियों से भी अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी को ऊर्जा संरक्षण के इस जनजागरूकता अभियान का हिस्सा बनना चाहिए।

संजय सेठ बोले- शहर में बाइक और स्कूटर से करूंगा सफर
रांची सांसद और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी कहा कि उन्होंने अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है। साथ ही उन्होंने संकल्प लिया है कि शहरी क्षेत्रों में वे अधिक से अधिक बाइक और स्कूटर से यात्रा करेंगे। संजय सेठ ने कहा कि उनका लगातार प्रयास रहेगा कि ईंधन की खपत कम हो और राष्ट्रहित में वे अपना योगदान दे सकें। उन्होंने रांचीवासियों से भी अपील की कि वे अपनी दैनिक जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव कर पेट्रोल और डीजल बचाने के इस अभियान से जुड़ें।
PM मोदी की अपील के बाद बढ़ी पहल
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन बचत, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की अपील की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री के काफिले का आकार भी कम किया गया था। अब राज्यों के राज्यपालों, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी इसी दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसे पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक प्रशासनिक कदम आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और टिकाऊ शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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