रांची, झारखंड में पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कर्मचारियों की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने राज्य सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आठ महीने पहले मांगी गई जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस पर आयोग ने सरकार को एक बार फिर तीन महीने की अंतिम मोहलत दी है।
मंगलवार को आयोग की टीम रांची पहुंची, जहां सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक हुई। इस दौरान आयोग ने सभी विभागों और संस्थानों से यह स्पष्ट ब्योरा मांगा कि उनके यहां कितने पिछड़ा वर्ग के कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें किस प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। बैठक में आईआईटी आईएसएम, देवघर एम्स, सीसीएल और बीसीसीएल सहित कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि अपनी-अपनी रिपोर्ट के साथ उपस्थित हुए।
बैठक में आयोग के सदस्य किरण उमेश महल्ले और सचिव मीता राजीव लोचन भी मौजूद रहीं। आयोग बुधवार को भी रांची में विभिन्न मामलों की समीक्षा करेगा।
126 मामलों पर हुई सुनवाई, 36 जातियों के प्रतिनिधि आमंत्रित
बैठक के दौरान कुल 126 मामलों पर सुनवाई की गई। पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आने वाली 36 जातियों के प्रतिनिधियों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था, जिनमें से करीब आधा दर्जन समुदायों ने आयोग के समक्ष अपनी बात रखी। हालांकि इस बार पिछली बैठकों की तरह ‘कुड़मी बनाम कुरमी’ जैसा विवादित मुद्दा नहीं उठा।
योजनाओं और सुविधाओं पर भी मांगी रिपोर्ट
आयोग ने प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, व्यावसायिक प्रशिक्षण, क्षमता विकास योजनाओं समेत अन्य कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत जानकारी मांगी। कुछ मामलों में आयोग की अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। साथ ही विदेशों में पढ़ाई कर रहे छात्रों से जुड़ी जानकारी भी एकत्र की गई।
बैठक में झारखंड के आदिवासी कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी और विशेष सचिव कर्मा जिम्पा भूटिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आयोग के इस सख्त रुख के बाद अब तय समयसीमा में राज्य सरकार द्वारा पूरी रिपोर्ट सौंपे जाने पर सभी की नजरें टिकी हैं।










