केरल में नेतृत्व पर कांग्रेस का फैसला: वीडी सतीशन होंगे मुख्यमंत्री, केसी वेणुगोपाल को झटका; लंबी खींचतान के बाद सहमति

केरल में नेतृत्व पर कांग्रेस का फैसला: वीडी सतीशन होंगे मुख्यमंत्री, केसी वेणुगोपाल को झटका; लंबी खींचतान के बाद सहमति

Johar News Times
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केरल की राजनीति में लंबे समय से चल रही खींचतान पर विराम लगाते हुए कांग्रेस ने आखिरकार मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया है। दिल्ली में गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी ने घोषणा की कि वी.डी. सतीशन केरल के नए मुख्यमंत्री होंगे। इस फैसले के साथ ही तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक चल रहे बैठकों और मंथन का लंबा दौर समाप्त हो गया।

मुख्यमंत्री पद की रेस में के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल था, जिन्हें राहुल गांधी के करीबी नेताओं में माना जाता है। लेकिन अंतिम निर्णय वी.डी. सतीशन के पक्ष में गया, जिसे पार्टी के भीतर एक अहम राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इस फैसले पर सहमति बनने में करीब 10 दिन लगे और कई स्तरों पर बैठकों का दौर चला। फैसले से पहले तिरुवनंतपुरम में अजय माकन और मुकुल वासनिक ने विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर राय ली थी। इसके बाद दिल्ली में राहुल गांधी के साथ केरल कांग्रेस नेताओं की कई दौर की चर्चा हुई, जिसके बाद नाम पर अंतिम मुहर लगी। संगठन के भीतर इस चयन को लेकर व्यापक विचार-विमर्श और संतुलन साधने की कोशिश की गई।

वी.डी. सतीशन को 61 वर्षीय अनुभवी नेता माना जाता है, जिन्होंने नेता प्रतिपक्ष के रूप में केरल विधानसभा में मजबूत भूमिका निभाई है। विपक्ष में रहते हुए उनकी सड़क से सदन तक सक्रिय भागीदारी और आक्रामक रुख की काफी सराहना होती रही है। माना जा रहा है कि केरल कांग्रेस संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता भी उनके चयन का बड़ा कारण रही। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय में यह भी ध्यान रखा गया कि पार्टी के भीतर एकजुटता बनी रहे। बताया जा रहा है कि वी.डी. सतीशन को राहुल गांधी का समर्थन प्राप्त है, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का रुख भी उनके पक्ष में रहा। इसी वजह से संगठनात्मक संतुलन बनाते हुए यह निर्णय लिया गया।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल के.सी. वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है, फिर भी अंतिम चयन किसी अन्य नेता के पक्ष में होना कांग्रेस की आंतरिक रणनीति को दर्शाता है। इससे पहले राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान देखने को मिली थी, जिसे देखते हुए केरल में अस्थिरता की आशंका जताई जा रही थी।फिलहाल पार्टी की ओर से उपमुख्यमंत्री पद या कैबिनेट ढांचे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों में शपथ ग्रहण की तारीख और सरकार की पूरी रूपरेखा भी स्पष्ट कर दी जाएगी, जिसके बाद केरल में नई सरकार का औपचारिक गठन होगा।

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