रांची , केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए सभी संबद्ध स्कूलों में ‘कंपोजिट स्किल लैब’ की स्थापना अनिवार्य कर दी है। बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, झारखंड सहित देशभर के पहले से संचालित स्कूलों को 22 अगस्त 2027 तक यह लैब विकसित करनी होगी, जबकि नए स्कूलों को मान्यता तभी मिलेगी जब उनके पास पूरी तरह से सुसज्जित लैब उपलब्ध होगी।
यह पहल National Education Policy 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के तहत कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। बोर्ड का मानना है कि छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए ऐसी लैब्स बेहद जरूरी हैं।

लैब स्थापित करना होगा अनिवार्य, CBSE के निर्देशानुसार स्कूलों को या तो 600 वर्गफुट का एक कंपोजिट स्किल लैब बनाना होगा या फिर दो अलग-अलग 400-400 वर्गफुट की लैब स्थापित करनी होगी। इनमें से एक लैब कक्षा 6 से 10 तक और दूसरी 11वीं-12वीं के छात्रों के लिए होगी। इन लैब्स में विभिन्न स्किल सेक्टर से जुड़े उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे छात्र ‘हैंड्स-ऑन लर्निंग’ के जरिए विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
नए स्कूलों के लिए सख्त नियम
CBSE ने स्पष्ट किया है कि नए स्कूलों को संबद्धता तभी दी जाएगी, जब उनके पास कंपोजिट स्किल लैब का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधन उपलब्ध हों। वहीं पहले से संचालित स्कूलों को इस दिशा में लगभग तीन साल का समय दिया गया है। बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि लैब का निर्माण करते समय सुरक्षा, उपलब्धता और उपयोगिता का विशेष ध्यान रखा जाए।
छात्रों को मिलेंगे ये प्रमुख लाभ
इस पहल से छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। लैब में कोडिंग, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे आधुनिक तकनीकी कौशल सिखाए जाएंगे। इससे छात्रों की रचनात्मकता, तार्किक क्षमता और समस्या समाधान कौशल विकसित होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपोजिट स्किल लैब के जरिए छात्र भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के लिए बेहतर तैयार हो सकेंगे। यह पहल न केवल शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाएगी, बल्कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल मानव संसाधन तैयार करने में भी मददगार साबित होगी।
जेवीएम श्यामली में अलग अलग विषयों के लैब जूनियर व सीनियर सेक्शन के लिए हैं। नए दिशा निर्देशों के अनुरूप जल्द ही कंपोजिट लैब को विकसित किया जाएगा ताकि स्कूल के बच्चों को इसका लाभ मिल सके। -: बीएन झा, प्रिंसिपल, जेवीएम श्यामली, रांची।
डीपीएस रांची में आधुनिक लैब पूर्व से उपलब्ध है। यहां बच्चों को विज्ञान और पर्यावरण संबंधी जानकारी दी जाती है। कंपोजिट लैब को विकसित कर जल्द ही बच्चों को रू-ब-रू कराया जाएगा। कौशल बोध विकसित करने के उद्देश्य से इसे विकसित किया जाएगा। – डॉ. जया चौहान, प्रिंसिपल, डीपीएस रांची।
सीबीएसई ने एनईपी 2020 अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए कंपोजिट स्किल लैब्स शुरू की हैं। ये लैब्स व्यावहारिक और अनुभव-आधारित सीखने में मदद करेंगी। -डॉ. तापस घोष, प्रिंसिपल, एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल पुंदाग, रांची।
कैरलि स्कूल में कंपोटिज लैब की सुविधा नहीं है लेकिन अलग अलग विज्ञान विषयों के लिए लैब और पर्याप्त संसाधन हैं। स्कूल प्रबंधन के द्वारा इसी वर्ष कंपोटिज लैब शुरू करने का निर्णय लिया गया है ताकि बच्चों को सारी जानकारी मिल सके। -राजेश पिल्लई, प्रिंसिपल, कैरलि स्कूल धुर्वा, रांची।

कंपोजिट लैब छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षताएं विकसित करने में भी सहायक होंगी। सीबीएसई के दिशा-निर्देशों के अनुसार इस लैब को डिजाइन किया गया है, जिसका लाभ बच्चों को मिल रहा है।-एसके मिश्रा, प्रिंसिपल, डीएवी बरियातू, रांची।











