कोल इंडिया लिमिटेड ने कोयला स्टॉक की जांच और निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक को लागू कर दिया है। लगातार सामने आ रही ओवररिपोर्टिंग, गलत आकलन और कोयले की हेराफेरी की शिकायतों के बाद कंपनी ने संशोधित “न्यू येलो बुक” के तहत पहली बार थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर तकनीक से कोयला स्टॉक की जांच पूरी की है।
अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह और मई महीने के दौरान विभिन्न परियोजनाओं में इस नई प्रणाली के जरिए जांच की गई और उसकी रिपोर्ट कोल इंडिया मुख्यालय को सौंप दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक लागू होने से कोयला स्टॉक के आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ी है और चोरी व भ्रष्टाचार पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो सकेगा।
अब वैज्ञानिक तरीके से होगी स्टॉक की माप
अब तक अधिकांश खदानों में कोयला स्टॉक का आकलन पारंपरिक सर्वे और मानवीय अनुमान के आधार पर किया जाता था। इस प्रक्रिया में कई बार त्रुटियां और हेरफेर की आशंका बनी रहती थी। कई परियोजनाओं में वास्तविक स्टॉक से अधिक कोयला दिखाने, रिकॉर्ड में अंतर और चोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही थीं।
सूत्रों के मुताबिक, कई मामलों में स्टॉक के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिलने के बावजूद उसका सटीक सत्यापन करना मुश्किल हो जाता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए कोल इंडिया ने डिजिटल और वैज्ञानिक प्रणाली को अपनाने का फैसला लिया।
थ्रीडी लेजर स्कैनर से हुई सटीक जांच
नई व्यवस्था के तहत पहली बार थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर की मदद से पूरे कोयला स्टॉक की त्रिआयामी डिजिटल स्कैनिंग की गई। इस तकनीक के जरिए कोयले के वास्तविक आयतन और घनत्व का बेहद सटीक आकलन संभव हो सका।
इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से सीधे स्टॉक और वॉल्यूम की गणना की गई। अधिकारियों के अनुसार, इस नई तकनीक से प्राप्त आंकड़े पारंपरिक पद्धति की तुलना में कहीं अधिक सटीक और पारदर्शी पाए गए हैं।
ओवररिपोर्टिंग और चोरी पर लगेगी रोक
नई हाईटेक व्यवस्था लागू होने से स्टॉक की ओवररिपोर्टिंग, कोयला चोरी और हेराफेरी जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण संभव माना जा रहा है। इसके साथ ही उत्पादन, डिस्पैच और उपलब्ध स्टॉक के आंकड़ों में भी पारदर्शिता बढ़ेगी।
कोल इंडिया के अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी और परियोजनाओं की जवाबदेही मजबूत होगी।
सभी परियोजनाओं में लागू होगी नई प्रणाली
अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती चरण में मिली सफलता के बाद अब इस तकनीक को सभी परियोजनाओं और ओपनकास्ट खदानों में लागू कर दिया गया है। कंपनी का उद्देश्य कोयला उत्पादन और भंडारण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को कम किया जा सके।
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