बोकारो। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता चम्पाई सोरेन ने बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के विस्थापितों की समस्याओं को लेकर आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। सेक्टर 11 में शहीद प्रेम प्रसाद महतो की प्रतिमा का अनावरण करते हुए उन्होंने राज्य सरकार और प्लांट प्रबंधन को खुली चुनौती दी। उन्होंने साफ कहा कि यदि 45 दिनों के भीतर विस्थापितों की मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वे स्वयं हजारों रैयतों के साथ मिलकर प्लांट की खाली जमीन पर हल चलाकर उसे जोत देंगे।
शहीद इंजीनियर की याद में भावुक हुए पूर्व सीएम
संबोधन के दौरान चम्पाई सोरेन ने पिछले वर्ष नौकरी की मांग के दौरान शहीद हुए युवा इंजीनियर प्रेम प्रसाद महतो को याद किया। उन्होंने कहा:
“यह बेहद शर्मनाक है कि 1960 के दशक में अपनी जमीन देने वाले लोग आज 60 साल बाद भी अपने हक के लिए जान देने को मजबूर हैं। एक शिक्षित इंजीनियर युवा को नौकरी देने के बजाय उसकी हत्या कर दी गई, जिससे एक विस्थापित परिवार का चिराग बुझ गया।”

“सर्टिफिकेट नहीं, नौकरी चाहिए”: चम्पाई सोरेन
पूर्व सीएम ने बीएसएल प्रबंधन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 1500 युवाओं को अप्रेंटिस के नाम पर ट्रेनिंग दी गई, लेकिन अंत में उन्हें नौकरी के बजाय सिर्फ कागज का एक टुकड़ा (सर्टिफिकेट) थमा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर युवाओं को सिर्फ ट्रेनिंग ही लेनी होती, तो देश में और भी संस्थान थे; उन्होंने जमीन इसलिए दी थी ताकि उनके परिवार को स्थायी रोजगार मिल सके।
नगड़ी आंदोलन की तर्ज पर होगा संघर्ष
अपने पुराने तेवर दिखाते हुए चम्पाई सोरेन ने रांची के नगड़ी आंदोलन का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे वहां सरकार ने किसानों की जमीन घेरने की कोशिश की थी और उन्हें ‘हाउस अरेस्ट’ तक किया गया था, लेकिन जैसे ही लाखों लोग हल-बैल लेकर पहुंचे, सरकार को झुकना पड़ा।
चम्पाई सोरेन की मुख्य मांगें और चेतावनी:
- समय सीमा: डेढ़ महीने (45 दिन) के भीतर समस्याओं का समाधान हो।
- रोजगार: अप्रेंटिस कर चुके युवाओं को तत्काल नौकरी दी जाए।
- जमीन वापसी: कानून के अनुसार, जो जमीन 12 साल तक इस्तेमाल नहीं हुई, उसे रैयतों को वापस किया जाए।
- कड़ी चेतावनी: “60 साल से खाली पड़ी जमीन पर अब शॉपिंग मॉल नहीं, विस्थापितों का हल चलेगा।”
विस्थापितों में जगी नई उम्मीद
चम्पाई सोरेन ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक शुरुआत ही टाटा स्टील और UCIL के खिलाफ आंदोलनों से हुई थी, जहां उन्होंने हजारों मजदूरों को हक दिलाया था। अब बोकारो के विस्थापितों को भी उसी तर्ज पर न्याय दिलाने का संकल्प लिया गया है। इस घोषणा के बाद से क्षेत्र के विस्थापितों और युवाओं में उत्साह का माहौल है और वे एक बड़े आंदोलन के लिए लामबंद होने लगे हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, बोकारो।










