नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई: भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का शोर मंगलवार शाम थम जाएगा। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले लागू होने वाली ‘शांत अवधि’ में किसी भी प्रकार की रैली, सभा या चुनाव प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
48 घंटे की ‘शांत अवधि’ लागू
निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार मतदान से दो दिन पहले सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को प्रचार बंद करना अनिवार्य होता है। इस दौरान जनसभाएं, रोड शो और किसी भी प्रकार की प्रचार गतिविधियां प्रतिबंधित रहती हैं, ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के अपना निर्णय ले सकें।
तमिलनाडु: 234 सीटों पर एक चरण में मतदान
तमिलनाडु में सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। इस चुनाव में 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला द्रमुक और अन्नाद्रमुक गठबंधन के बीच माना जा रहा है।
इसके अलावा अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके भी कई सीटों पर मुकाबले को दिलचस्प बना रही है। राज्य में 5.73 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान के पात्र हैं।
पश्चिम बंगाल: पहले चरण में 152 सीटों पर वोटिंग
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा। ये सीटें 16 जिलों में फैली हैं, जिनमें मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, पश्चिम बर्द्धमान, झाड़ग्राम, पुरुलिया और बांकुड़ा जैसे जिले शामिल हैं।
पहले चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 60 लाख से अधिक है, जिसमें पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।
चुनाव आयोग की तैयारियां पूरी
दोनों राज्यों में मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की व्यापक तैयारियां की गई हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
अब निगाहें 23 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जहां मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर नई सरकार की दिशा तय करेंगे।










