झारखंड सरकार ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक शानदार योजना लेकर आई है। अगर आप भी कम लागत में एक बेहतरीन बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत अब राज्य में “व्यावसायिक बकरा-बकरी पालन योजना” को हरी झंडी दे दी गई है।
कैबिनेट बैठक में इस योजना के लिए 30 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी गई है। आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ आपको कैसे मिल सकता है।
9.78 लाख के प्रोजेक्ट पर 6.84 लाख की भारी छूट
सरकार ने 100 बकरियों और 5 बकरों की क्षमता वाले एक कमर्शियल फार्म को शुरू करने की कुल लागत ₹9.78 लाख तय की है। खास बात यह है कि इस लागत का 70 प्रतिशत हिस्सा सरकार सब्सिडी के रूप में खुद देगी।
दो किस्तों में मिलेगी राशि:
यह सब्सिडी दो चरणों में सीधे आपके खाते में आएगी:
- पहली किस्त: कुल अनुदान का 40% हिस्सा मिलेगा।
- दूसरी किस्त: काम आगे बढ़ने पर बाकी का 60% हिस्सा जारी किया जाएगा।
इन 437 भाग्यशाली लोगों को मिलेगा मौका
इस योजना के तहत पूरे झारखंड से कुल 437 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए सीटों का बंटवारा इस प्रकार किया गया है:
| वर्ग | चयनित लाभुकों की संख्या |
| सामान्य वर्ग | 219 |
| जनजातीय क्षेत्र उपयोजना | 189 |
| अनुसूचित जाति उपयोजना | 29 |
| कुल | 437 |
किन्हें मिलेगी प्राथमिकता?
व्यक्तिगत किसानों के अलावा स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन भी इसका लाभ ले सकते हैं। जिन आवेदकों के पास बकरी पालन का पहले से प्रशिक्षण सर्टिफिकेट है, उन्हें चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।
क्या हैं आवेदन के लिए जरूरी शर्तें ?
यदि आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपके पास निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए:
आवेदक का झारखंड का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
फार्म खोलने के लिए कम से कम आधा एकड़ जमीन होनी चाहिए ।
आवेदक को बकरी पालन का पूर्व अनुभव होना चाहिए। साथ ही बैंक द्वारा जारी वित्तीय क्षमता प्रमाण-पत्र या पिछले 1 साल का औसत बैंक बैलेंस दिखाना होगा।
चयनित लाभार्थी को एक शपथ-पत्र देना होगा कि वह कम से कम 10 वर्षों तक इस फार्म को सफलतापूर्वक चलाएगा।
ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए वरदान
झारखंड सरकार का मानना है कि इस योजना से न सिर्फ पशुपालन क्षेत्र में नए उद्यमी तैयार होंगे, बल्कि ग्रामीण युवाओं को उनके गांव में ही रोजगार मिल सकेगा। जैविक प्रमाणन योजना के बाद, सरकार का यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती देने वाला साबित होगा।
